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थोक महंगाई भी बढ़ी, ब्याज दरों में कटौती के आसार नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 June 2016, 15:48 IST
QUICK PILL
  • खाने-पीने के सामान की बढ़ी कीमतों की वजह से लगातार दूसरे महीने थोक महंगाई में बढ़ोतरी हुई है. मई महीने में थोक महंगाई दर बढ़कर 0.79 फीसदी हो गई. अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर 0.34 फीसदी थी.
  • पिछले साल इसी महीने में डब्ल्यूपीआई की दर -2.20 फीसदी थी. डब्ल्यूपीआई में 17 महीनों की गिरावट के बाद पिछले दो महीनों से बढ़ोतरी जारी है. 
  • मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.76 फीसदी हो चुकी है. अप्रैल महीने में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स को संशोधित कर 5.47 फीसदी कर दिया गया है. पहले यह अनुमान 5.39 फीसदी का था.
  • महंगाई दर के आंकड़ों के सामने आने के बाद ब्याज दरों में कटौती की संभावना खत्म होती नजर आ रही है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों के आधार पर ब्याज दरों को तय करता है. 
  • आरबीआई ने इस महीने ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया था. आरबीआई ने जनवरी 2017 के लिए 5 फीसदी महंगाई दर का लक्ष्य रखा था. लेकिन मौजूदा आंकड़े आरबीआई के तय लक्ष्य से ऊपर जा रहे हैं. 

खाने-पीने के सामान की बढ़ी कीमतों की वजह से लगातार दूसरे महीने थोक महंगाई में बढ़ोतरी हुई है. मई महीने में थोक महंगाई दर बढ़कर 0.79 फीसदी हो गई. अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर 0.34 फीसदी थी.

पिछले साल इसी महीने में डब्ल्यूपीआई की दर -2.20 फ ीसदी थी. डब्ल्यूपीआई में 17 महीनों की गिरावट के बाद पिछले दो महीनों से बढ़ोतरी जारी है. 

महंगाई में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई तेजी है. मई महीने में खाद्य महंगाई दर 7.88 फीसदी रही जबकि पिछले महीने अप्रैल में यह 4.23 फीसदी थी. 

खाद्य पदार्थों विशेषकर सब्जियों की कीमतों में दहाई अंकों की बढ़ोतरी की वजह से महंगाई में इजाफा हुआ है. इसके अलावा मई महीने में अंडे, मांस और मछली की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई.

मई महीने में सब्जियों की कीमतों में उछाल देखने को मिला. एक महीने पहले जहां सब्जियों की महंगाई दर 2.21 फीसदी थी वह मई महीने में बढ़कर 7.88 फीसदी हो गई. खाने के तेल की कीमतों में 12.94 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि पिछले महीने इसकी  दर 2.21 फीसदी थी.

दालों की कीमतों में कोई बदलाव देखने को मिला. दाल की महंगाई दर 35.56 फीसदी रही. अप्रैल महीने में यह 36.36 फीसदी थी. 

आरबीआई ने इस महीने ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया था.

महंगाई दर के आंकड़ों के सामने आने के बाद भारत के सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था को लेकर चल रही बहस पर विराम लगता दिख रहा है. पिछले महीने ही जीडीपी का आंकड़ा आया था. पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में भारत की जीडीपी दर 7.9 फीसदी रही थी.

ब्याज दरों से नहीं मिलेगी राहत!

थोक महंगाई दर का आंकड़ा खुदरा महंगाई दर के आंकड़े के एक दिन बाद आया है. मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.78 फीसदी हो गई थी जो 21 महीनों का उच्चतम स्तर है. महंगाई दर के आंकड़ों के सामने आने के बाद ब्याज दरों में कटौती की संभावना खत्म होती नजर आ रही है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों के आधार पर ब्याज दरों को तय करता है. आरबीआई ने इस महीने ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया था. आरबीआई ने जनवरी 2017 के लिए 5 फीसदी महंगाई दर का लक्ष्य रखा था. लेकिन मौजूदा आंकड़े आरबीआई के तय लक्ष्य से ऊपर जा रहे हैं. 

ऐसे में आने वाले समीक्षा के दौरान आरबीआई की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की संभावना लगभग खत्म हो गई है.

सरकार के लिए चुनौती

महंगाई में वृद्धि मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है. पिछले दो सालों के दौरान सरकार को महंगाई दर के  नीचे रहने से फायदा मिलता रहा है. सरकार को इस मामले में घरेलू मोर्चे से ज्यादा वैश्विक मोर्चे पर राहत मिली.

पिछले दो सालों के दौरान कच्चे तेल की कीमत में गिरावट रही. वहीं खराब मॉनसून की वजह से घरेलू मोर्चे पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग की स्थिति बेहद कमजोर रही. 

हालांकि अब स्थितियां बदलने लगी है. मई महीने के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई करीब 5 फीसदी की बढ़ोतरी और अब महंगाई दर में वृद्धि सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

उम्मीद पर सरकार

सरकार को इस बार मानसून के बेहतर रहने की उम्मीद है. दो सालों के सूखे के बाद मौसम विज्ञान ने इस बार सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई है. बेहतर मॉनसून से ग्रोथ को बनाए रखने के साथ खाद्य महंगाई दर को रोकने में मदद मिलेगी.

First published: 14 June 2016, 15:48 IST
 
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