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मिलिए टीम जेटली से, जो कर रही है मोदी के सपनो का बजट तैयार

सुनील रावत | Updated on: 27 January 2018, 16:12 IST

आगामी एक फ़रवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली अगला आम बजट पेश करेंगे. बजट की तैयारी में इन दिनों अरुण जेटली की टीम लगी हुई है. जेटली की इस टीम में सरकार के वित्त सचिव से लेकर मुख्य आर्थिकसलाहकार अरविन्द  सुब्रमण्यम तक शामिल हैं. आइये जानते वित्त मंत्री अरुण जेटली की वह कौन सी टीम है जो सरकार की आर्थिक नीतियों को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. 

हंसमुख अधिया (वित्त सचिव)

अशोक लवासा के अक्टूबर में सेवानिवृत्त होने के बाद हंसमुख अधिया को वित्त सचिव नामित किया गया था. जीएसटी को लागू करने में आधिया की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. मोदी के करीबी माने जाने वाले अधिया ने जीएसटी लागू होने के बाद इसकी जागरूकता के लिए पूरे देश में व्यापारी वर्ग से मुलाकात की थी. अधिया को अगली कैबिनेट सचिव के रूप में एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जाता है. 

हंसमुख अधिया (वित्त सचिव)

सुभाष गर्ग (इकनोमिक अफेयर्स सेक्रेटरी)

1983 बैच के राजस्थान केडर अधिकारी सुभाष गर्ग ने जून में शक्तिकांत दास की सेवानिवृत्ति के बादआर्थिक मामलों के सचिव का पद संभाला था. गर्ग इससे पहले भूटान, बांग्लादेश, भारत और श्रीलंका के लिए विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं. यह सचिव के रूप में उनका पहला बजट होगा. 

सुभाष गर्ग (इकनोमिक अफेयर्स सेक्रेटरी)

नीरज गुप्ता  डिसइनवेस्टमेंट सेक्रेटरी)

पहले विनिवेश विभाग हर साल वार्षिक हिस्सेदारी बिक्री में 300 बिलियन अंक तक पहुंचने के लिए संघर्ष करता था. गुप्ता के आने के बाद इस साल यह 9 00 अरब रुपये से अधिक पहुंच गया. इनमें से बहुत से आय बैकबैक्स से आए हैं और एक पीएसयू दूसरे को प्राप्त कर रही है. विभाग ने कई आईपीओ भी चलाए हैं और दो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स लॉन्च किए हैं. वित्त वर्ष 2019 में विभाग को मुश्किल लक्ष्य दिया जायेगा.

नीरज गुप्ता डिसइनवेस्टमेंट सेक्रेटरी)

अजय नारायण झा (एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी)

1982 बैच के मणिपुर कैडर अधिकारी अजय नारायण झा ने अशोक लवासा के सेवानिवृत्ति के बाद व्यय सचिव के रूप में पदभार संभाला. इससे पहले वह पर्यावरण मंत्रालय के सचिव थे. उनके पास व्यय विभाग और वित्त आयोग में काम करने का भी अनुभव है. अब उनका काम 23-24 खरब डॉलर के बजट किटी को संतुलित करने और चैनल को रिकॉर्ड पूंजीगत खर्च में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते बढ़ती सब्सिडी, किसानों के लिए प्रमुख योजनाएं, ग्रामीण क्षेत्रों, किफायती आवास और रोजगार, और रक्षा में मदद करना है.

अजय नारायण झा

राजीव कुमार (फाइनैंशल सर्विस सेक्रेटरी)

राजीव कुमार पिछले अगस्त में सचिव के रूप में शामिल हुए थे. पब्लिक सेक्टर बैंक एनपीए की मुश्किलों के के कारण केंद्र सरकार को उनकी जरूरत थी. दो महीने बाद सरकार ने पब्लिक सेक्टर बैंक को सरकार ने एक ऐतिहासिक 2.11 ट्रिलियन की मदद की. केंद्रीय बजट बनाने मे यह कुमार की पहली नियुक्ति नहीं है, उन्होंने 2012 और 2015 के बीच व्यय विभाग में अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव के पदों के रूप में भी काम  किया। इस कार्यकाल के दौरानउन्होंने वित्त आयोग और लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली में बदलाव लाने का काम किया.

राजीव कुमार

अरविन्द सुब्रमण्यम (मुख्य आर्थिक सलाहकार)

यह अरविन्दसुब्रमण्यम का आखिरी  बजट हो सकता है। वह जेटली के बजट बनाने वाली टीमों के प्रमुख सदस्य के रूप में  शामिल रहे हैं. उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षणों  का विस्तार किया है. वह मौद्रिक नीति समिति के मुद्रास्फीति के मॉडलिंग की आलोचक रहे हैं. 

अरविंद सुब्रमण्‍यम पीटरसन इंस्‍टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्‍स में डेनिस वेदरस्‍टोन सीनियर फेलो और वैश्विक विकास केन्द्र में सीनियर फेलो हैं. उनकी पुरस्‍कार विजेता पुस्‍तक ‘इक्लिप्‍स: लिविंग इन द शैडो ऑफ चाइनाज इकोनॉमिक डोमिनेंस’ सितंबर 2011 में प्रकाशित हुई थी और चार भाषाओं में इसकी 130,000 प्रतियां छापी गई हैं.

‘फॉरेन पॉलिसी’ नामक पत्रिका ने उन्‍हें वर्ष 2011 में विश्‍व के शीर्ष 100 वैश्विक चिंतकों में शुमार किया था। वर्ष 2011 में पत्रिका ‘इंडिया टुडे’ ने उन्‍हें पिछले तीस वर्षों के दौरान भारत के शीर्ष 30 ‘मास्‍टर्स ऑफ द माइंड’ में शामिल किया था.

डॉ॰ सुब्रमण्‍यम अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष के शोध विभाग (1992-2013) में एवं उरुग्‍वे दौर की व्‍यापार वार्ताओं के दौरान गैट (1988-1992) में कार्यरत रहे थे.

अरविंद सुब्रमण्यम
First published: 27 January 2018, 16:06 IST
 
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