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नाराज ममता का जीएसटी पर यू-टर्न, गैर भाजपा शासित राज्य भी बदल सकते हैं सुर

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 2 September 2016, 8:12 IST
(कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • 29 अगस्त को बंगाल सरकार ने जीएसटी विधेयक 30 दिन के भीतर आधे राज्यों की स्वीकृति के साथ पारित करवाने की केंद्र सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. 
  • इस कदम से केंद्र सरकार को जीएसटी विधेयक इसकी समय सीमा यानी कि अप्रैल 2017 से पहले पारित करवाने में मुश्किलें आ सकती हैं.
  • ममता बनर्जी ने जीएसटी विधेयक को एक ‘सकारात्मक कर प्रस्ताव’ की संज्ञा बताते हुए अमित मित्रा को निर्देश दिए थे कि वे इसके पास होने में कोई बाधा न आने दें.

राज्यों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली व केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच गत 14 जून को हुई बैठक में ही संसद के राज्यसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) की आधारशिला तैयार हो गई थी.

मामले के जानकारों का कहना है कि बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा जो कि राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकृत समिति के अध्यक्ष भी हैं ने बाकी राज्यों को जीएसटी पर मनाने और इसे जल्द से जल्द पारित करने के विचार में अहम भूमिका निभाई थी.

पश्चिम बंगाल सहित बहुत से राज्य राजस्व घाटे की आशंका के चलते जीएसटी पर आपत्ति जता रहे थे.

वरना इससे पहले पश्चिम बंगाल सहित बहुत से राज्य राजस्व घाटे की आशंका के चलते जीएसटी पर आपत्ति जता रहे थे.

उक्त बैठक के बाद एनडीए सरकार को विश्वास हो गया कि संसद में इस व्यवस्था के साथ यह संविधान संशोधन विधेयक पारित कर सकती है कि केंद्र सरकार जीएसटी लागू होने के पहले पांच सालों में होने वाले राजस्व घाटे के लिए राज्यों को मुआवजा देगी. राज्यसभा में यह विधेयक अच्छे खासे 203 मतों के साथ पारित हुआ है.

रुख बदला

सोमवार (29 अगस्त) को बंगाल सरकार ने यह विधेयक 30 दिन के भीतर आधे राज्यों की स्वीकृति के साथ पारित करवाने की केंद्र सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

अब तक, चार राज्यों दिल्ली, असम, बिहार और झारखंड ने इस विधेयक को अपनी विधानसभाओं में मंजूरी दे दी है.

हालांकि सोमवार को ममता बनर्जी ने कहा कि वक्त की कमी के चलते वे अपने एक दिन के विधानसभा सत्र में जीएसटी विधेयक को एजेंडा में शामिल नहीं कर रही हैं, इसकी वजह राजनीतिक नहीं है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ममता केंद्र द्वारा राज्य के सहकारिता संघ को तोड़ने की कोशिशें करने से नाराज हैं और देखना चाहती हैं कि बाकी गैर भाजपा शासित राज्य इस जीएसटी विधेयक के प्रति क्या प्रतिक्रिया देते हैं.

यद्यपि दो गैर-भाजपा शासित राज्य पहले ही विधेयक को मंजूरी दे चुके हैं, इसके बावजूद बंगाल सरकार का इससे पीछे हटना गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के मन में संदेह पैदा करता है और इस सबसे केंद्र सरकार को जीएसटी विधेयक इसकी समय सीमा यानी कि अप्रैल 2017 से पूर्व पारित करवाने में मुश्किलें आ सकती हैं.

नाराज ममता

एक ओर जहां, बंगाल सरकार ने इस विधेयक को मंजूरी न देने के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई है, वहीं दूसरी ओर सूत्रों का कहना है कि ममता केंद्र द्वारा नाबन्ना (प्रदेश सचिवालय) में सरकारी कोष को सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने के लिए बिना किसी आधिकारिक संवाद के अधिकारियों को भेजने से नाराज हैं.

इनमें से किसी भी अधिकारी को राजकोष तक प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि मुख्यमंत्री ने इसे संघीय ढांचे का ‘गंभीर उल्लंघन’ माना है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र द्वारा राज्य के सहकारिता संघ को तोड़ने की कोशिशें करने से नाराज हैं.

जीएसटी से केंद्र सरकार को राज्य सरकारों का राजस्व संग्रहण करने और इनका वितरण करने का अधिकार मिल जाएगा और ज्यादातर राज्य सरकारें जहां क्षेत्रीय दल सत्ता में हैं, उन्हें आशंका है कि जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र के हाथों में सारे अधिकार आ जाएंगे.

भारत को अपने सभी राजनीतिक दलों को यह समझाने में एक दशक से भी अधिक समय लग गया कि जीएसटी से वित्तीय शक्तियों का केंद्रीकरण नहीं होगा, लेकिन केंद्र सरकार के इस कदम पर ममता की नाराजगी से अब बात बिगड़ सकती है.

केंद्र की जिन बातों पर ममता नाराज हुई हैं, उनमें से कुछ हैं:

1. राज्य कोष को केंद्र के तंत्र से जोड़ना- केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए एक सर्कुलर में कहा गया, ‘खर्च के बारे में जानकारी रखना एक महत्वपूर्ण निगरानी हथियार है. इस प्रकार सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली 2016-17 में राज्यों के राजकोषों के साथ जोड़ दी जाएगी.

2. नीति आयोग कुछ महत्वपूर्ण केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं की निगरानी करेगा और उनका स्वतंत्र आकलन करेगा. विशेष कर इसलिए क्योंकि पूंजीगत व्यय को ही पूंजीगत अंतिम परिणाम में बदलने की जरूरत है. ये व्यवस्थाएं चालू वित्तीय वर्ष 2016-2017 में लागू हुईं.

3. एक अन्य केंद्रीय सूचना में कहा गया है कि राज्यों को केंद्र की मुख्य योजनाओं में अनिवार्य रूप से भाग लेना है और इसका 40 फीसदी खर्च भी उठाना होगा.

4. केंद्र ने 39 बड़ी योजनाओं से वित्तीय सहायता वापस ले ली है. 58 कल्याणकारी योजनाओं में से अपना हिस्सा भी वापस ले लिया.

जीएसटी पर ममता का यू टर्न केंद्र पर दबाव बनाकर राज्य के बकाया ऋण को संशोधित करने का दांव हो सकता है.

गौरतलब है कि पूर्व में ममता ने जीएसटी विधेयक को एक ‘सकारात्मक कर प्रस्ताव’ की संज्ञा दी थी और अमित मित्रा को निर्देश दिए थे कि वे इसके पास होने में कोई बाधा न आने दे.

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि जीएसटी पर ममता का यू टर्न संभवतः इसलिए हो कि वे केंद्र पर दबाव बनाकर राज्य के बकाया ऋण को संशोधित कर दें, जो कि 2015-16 के लिए करीब 3.05 लाख करोड़ बताया जा रहा है.

ममता के यूटर्न की चाहे जो भी वजह हो, केंद्र को बंगाल का समर्थन पाने में फुर्ती दिखानी होगी ताकि वह अगले साल से जीएसटी लागू कर सके.

First published: 2 September 2016, 8:12 IST
 
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