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एयरलाइंस में वेब चेक-इन शुल्क देने से अच्छा है ट्रेन से सफर करें, नहीं लेंगे चार्ज : रेल मंत्रालय

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 November 2018, 11:02 IST

एयरलाइंस पर सभी सीटों के लिए वेब चेक-इन शुल्क लगाने के फैसले के के बाद रेल मंत्रालय ने यात्रियों से कहा है कि उन्हें यहां इस सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त भुगतान करने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे सस्ती दरों पर ट्रेन से यात्रा कर सकते हैं.

रेल मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा ''जब आप ट्रेन ले सकते हैं तो फ्लाइट्स पर वेब चेक-इन के लिए प्रीमियम का भुगतान क्यों करें. रेलवे ने का कहना है "वेब चेक-इन के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है. आपके सामान में जांच के लिए कोई लंबी कतार नहीं है. अयोग्य टैरिफ से बचें और अच्छे पुराने भारतीय रेलवे पर सस्ती दरों पर यात्रा करें." यह पोस्ट रेलवे मंत्रालय के फेसबुक पेज पर भी साझा किया गया है.

इंडिगो 14 नवंबर 2018 से वेब चेक-इन के लिए शुल्क लेने का फैसला किया है. एक ट्वीट में उसने कहा "हमारी संशोधित नीति के अनुसार सभी सीट वेब चेक-इन के लिए शुल्क योग्य हैं. वैकल्पिक रूप से आप हवाई अड्डे पर मुफ्त में चेक-इन कर सकते हैं. सीटों को उपलब्धता के अनुसार सौंपा जाएगा''.

इस बीच ट्विटर पर सोमवार को एक ग्राहक की पूछताछ का जवाब देते हुए स्पाइसजेट ने कहा कि "वेब चेक-इन के माध्यम से सीटों का पूर्व आवंटन चार्ज करने योग्य आधार पर है. अगर कोई यात्री सीट के लिए भुगतान नहीं करना चाहता है, तो वह हवाई अड्डे पर चेक-इन करते समय एक बेहतर सीट के लिए अनुरोध कर सकता है. एयरलाइन ने कहा, "अगर उपलब्ध हो तो हमारी टीम बिना शुल्क के सीट मुहैया कराएगी."

गौरतलब है कि परिचालन लागत बढ़ने के साथ, एयरलाइंस सहायक सेवाओं से अपने राजस्व बढ़ाने के तरीकों की तलाश कर रही है. पिछले महीने रेलवे ने 15 प्रीमियम ट्रेनों में फ्लेक्सी किराए की घोषणा की थी.पिछले वित्त वर्ष में रेलवे ने फ्लेक्सी किराए से 800 करोड़ रुपये कमाए.

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First published: 27 November 2018, 10:57 IST
 
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