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Make In India से जुड़े 13 हजार करोड़ के ठेके सरकार ने क्यों बदल दिए ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 May 2018, 11:19 IST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद मेक इन इंडिया सबसे महत्वाकांक्षी योजाओं में से एक रही है, लेकिन बीते चार साल से मेक इन इंडिया मे आये उतार-चढ़ाव का इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार ने अब तक इस योजना के तहत 130 अरब रुपये के टेंडर्स या तो रद्द कर दिए या उनको वापस ले लिया. इसके पीछे कारण यह रहा कि डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) ने 'भारत में बने' उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए अपने शर्तें बदल दी.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "भारत में बने 'उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए डीआईपीपी सार्वजनिक खरीद आदेश 2017 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए हर कदम उठा रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने 15 जून 2017 को भारत में माल और सेवाओं के निर्माण और उत्पादन को बढ़ावा देने और देश में आय और रोजगार बढ़ाने के लिए आदेश जारी किया. इसमें एक टेंडर की कीमत 8,000 करोड़ रुपये थी जिसे वापस ले लिया गया था और डीआईपीपी के हस्तक्षेप के बाद संशोधित स्थितियों के साथ फिर से जारी किया गया. यह परियोजना गैसीफिकेशन के लिए यूरिया और अमोनिया संयंत्र की लगाने से संबंधित था.

इसी तरह ट्रेन सेट कोच की खरीद के लिए एक निविदा रद्द कर दी गई क्योंकि निविदा में कुछ प्रतिबंधक स्थितियां थी जो घरेलू निर्माताओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण थीं और विदेशी कंपनियों के पक्ष में थीं. परियोजना की लागत 5,000 करोड़ रुपये थी. इससे पहले मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सामानों की खरीद से संबंधित टेंडर दस्तावेजों में घरेलू उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण शर्ते रहने पर चिंता जता चुके हैं.

विभाग इस संबंध में सभी संबंधित विभागों और इस्पात, रेलवे, रक्षा, तेल और गैस, फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, कपड़ा, नौवहन और बिजली सहित अन्य मंत्रालयों के साथ बैठकों की श्रृंखला आयोजित कर रहा है.

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First published: 25 May 2018, 11:17 IST
 
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