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क्या एफडीआई पर पीएम मोदी बदल गए?

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 June 2016, 16:06 IST
(फाइल फोटो)

2012 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी. यूपीए सरकार ने 2012 में मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी थी.

उस समय वामदलों के अलावा बीजेपी ने भी इसका विरोध किया था. अब पिछले एक साल सालों के अंदर बीजेपी ने दो बार एफडीआई के मसले पर यू-टर्न लिया है.

सोमवार को मोदी सरकार ने रक्षा, विमानन और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी. इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग, डीटीएच, केबल जैसे तमाम सेक्टरों में भी 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दी गई है.

सिंगल ब्रांड खुदरा कारोबार में नियमों में ढील देते हुए 3 और 5 सालों के लिए टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट में पहले से 49 फीसदी एफडीआई को बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया गया है.

मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई पर बीजेपी ने बदला रूख

लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के शीर्ष नेता अक्सर इस बात को दोहराते थे कि सत्ता में आने पर मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई को अनुमति देने संबंधी संप्रग सरकार के फैसले को वापस ले लिया जाएगा.

2013 में बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने किसानों की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर उनकी पार्टी 2014 में सत्ता में आई तो खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति के उस फैसले को वापस ले लिए जाएगा, जिससे देश के लाखों व्यापारियों और कारोबारियों के हितों को नुकसान हो रहा है.

इसके अलावा उस समय राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली ने कहा था कि बीजेपी एफडीआई के फैसले का 'आखिरी दम' तक विरोध करेगी. हालांकि, सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई की नीति नहीं बदली.

बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ाई

2013 में जब मनमोहन सरकार ने बीमा विधेयक में बीमा क्षेत्र में एफडीआई को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने को हरी झंडी दी तो बीजेपी ने इसका कड़ा विरोध किया था. हालांकि, केंद्र में सत्तासीन होने के बाद बीजेपी ने बीमा क्षेत्र के नियमों को सरल बना दिया. इसी साल मार्च महीने में बीमा क्षेत्र में विदेशी कंपनियां को अब बिना पूर्व मंजूरी के ही 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी गयी है.

सोशल मीडिया पर लोगों ने ली चुटकी

मोदी सरकार के घोषणा के बाद ट्विटर पर कई लोगों ने बीजेपी नेताओं के एफडीआई विरोध वाले पुराने बयानों को ट्वीट करना शुरू कर दिया. 2013 में प्रकाश जावड़ेकर ने रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा था, 'टेलीकॉम और रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश से सुरक्षा के लिए खतरे पैदा हो सकते हैं और इसके तहत नई तकनीक मिलने की गारंटी भी नहीं है.'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दावा किया कि भारत एफडीआई के मामले में दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्था बन गया है जबकि दिसंबर 2012 में किए गए एक ट्वीट में मोदी ने लिखा था, 'कांग्रेस राष्ट्र को विदेशियों को सौंप रही है. अधिकतर पार्टियां एफडीआई का विरोध कर रही हैं लेकिन सीबीआई के डर की वजह से उन्होंने मतदान नहीं किया और कांग्रेस बैकडोर से जीत गई.'

वहीं सितंबर 2012 में किए गए एक अन्य ट्वीट में मोदी ने कहा था, 'असम और एफडीआई का मुद्दा बताता है कि हमारे प्रधानमंत्री ने हमारे लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ़ दी है. विदेशियों की सरकार, विदेशियों के द्वारा, विदेशियों के लिए.'

अब कांग्रेस ने किया एफडीआई का विरोध

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने रक्षा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति को गलत निर्णय करार दिया है. उन्होंने कहा कि एफडीआई नीति में 'व्यापक' बदलाव ने राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के लिए बड़ा खतरा है.

वहीं सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में एफडीआई 'खतरनाक' है. उन्होंने कहा कि बेहद कम देश हैं जिन्होंने इस संवेदनशील क्षेत्र में एफडीआई को मंजूरी दी है.

इसके अलावा आरएसएस से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने इसे जनता के भरोसे के साथ 'विश्वासघात' करार दिया है.एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा, 'खुदरा, रक्षा और फार्मा जैसे क्षेत्रों को एफडीआई के लिए खोलना और मानदंडों में ढील देना देश की जनता के साथ विश्वासघात है. ऐसा करके सरकार ने देश के लिए और खासतौर पर स्थानीय व्यापारियों के लिए अच्छा नहीं किया है.'

First published: 21 June 2016, 16:06 IST
 
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