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लेनदेन के लिए 'भीम' ऐप को आधार से जोड़ेगी सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 January 2017, 16:40 IST

जल्द ही आपका आधार कार्ड एक यूनिवर्सल पेमेंट आईडी बन सकता है. कुछ हफ्तों में सरकार भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) ऐप के जरिये पेमेंट्स के लिए एक नए फीचर को जारी कर सकती है. इसके जरिये भीम ऐप में केवल 12 अंकों का आधार नंबर डालकर इसे कनेक्ट करना होगा.

ऐसे ट्रांजैक्शंस जहां भीम ऐप में एक पेमेंट आईडी के रूप में 'आधार' लिखा होगा, उसके लिए पहले किसी बायोमेट्रिक सत्यापन, बैंक के साथ पहले से किसी रजिस्ट्रेशन या यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) की जरूरत नहीं होगी. 

इससे आधार से जुड़ा भीम ऐप मुख्यधारा में प्रमुखता से शामिल हो सकेगा क्योंकि एक तिहाई भारत की आधार संख्या पहले से ही उनके बैंक अकाउंट्स से जुड़ी हुई है. 

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यूआईडीएआई (यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) फिलहाल बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ काम कर रही है और संभवता अगले कुछ हफ्तों में इस फीचर को जारी कर सकती है.

यूआईडीएआई के चीफ एग्जीक्यूटिव अजय भूषण पांडेय ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि पहले ही 38 करोड़ भारतवासी अपने आधार नंबर को बैंकों से जोड़ चुके हैं और बिना रजिस्टर कराए सीधे यूपीआई ऐप से पैसे प्राप्त कर सकते हैं.

चूंकि भीम ऐप किसी मोबाइल नंबर पर पैसे भेजने की अनुमित देता है, इसलिए जरूरी है कि पैसे पाने वाला इसके लिए आवश्यक यूपीआई से रजिस्टर हो. इससे उलट डेबिट कार्ड डिटेल्स डालकर यूपीआई पिन जनरेट करने की लंबी प्रक्रिया, संभवता गरीबों और अनपढ़ों को निराश कर सकती है.

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अजय भूषण कहते हैं, "केवल आधार के जरिये कोई भी व्यक्ति चाहे वो भीम का इस्तेमाल कर रहा हो या नहीं, अगर उसका बैंक अकाउंट आधार से जुड़ा है तो सीधे पैसे बैंक अकाउंट में प्राप्त कर सकता है." 

उन्होंने आगे कहा कि हर महीने तकरीबन दो करोड़ लोग अपने बैंक अकाउंट को आधार नंबर से जोड़ रहे हैं और ऐसे बैंक खातों की संख्या अगले दो-तीन महीने में 50-60 करोड़ पहुंच सकती है.

फिलहाल भीम ऐप में पेमेंट के पांच विकल्प हैंः इनमें अन्य के अलावा मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट या आईएफएससी कोड भी शामिल हैं. आधार संख्या इनमें छठा विकल्प होगा. अजय भूषण कहते हैं कि हालांकि इनमें कुछ परेशानियां हैं, लेकिन सुरक्षा बढ़ाने को लेकर काम किया जा रहा है.

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आधार को पेमेंट एड्रेस बनाना योजना का केवल एक हिस्सा है. यह भी संभव है कि पीओएस मशीनों (प्वाइंट ऑफ सेल) में केवल आधार नंबर डाला जाए और बायोमेट्रिक के जरिये पहचान सत्यापित कर पेमेंट पूरा कर दिया जाए. यह फीचर पैसे प्राप्त करने के बजाए चुकाने के लिए ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है. 

First published: 17 January 2017, 16:40 IST
 
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