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RBI विवाद: सरकार ने नहीं मांगे 3.6 लाख करोड़ रुपये, आर्थिक मामलों के सचिव ने किया ये बड़ा खुलासा

दीपक कुमार सिंह | Updated on: 9 November 2018, 15:13 IST

रिज़र्व बैंक और सरकार के बीच चल रहे तनातनी के दौरान टकराव के बीच आर्थिक मामलों के सचिव (Economic Affairs Secretary) सुभाष चंद्र गर्ग ने सरकार द्वारा 3.6 लाख करोड़ की मांग वाली खबर  को सिरे से ख़ारिज कर दिया है. गर्ग ने साफ तौर पर कहा कि वित्त मंत्रालय ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) को सरप्लस के 3.6 लाख करोड़ देने संबंधित कोई प्रपोजल नहीं दिया है.

मीडिया में गलत अनुमान लगाया गया

गर्ग ने कहा कि "मीडिया में गलत अनुमान लगाया गया और सरकार का राजकोषीय गणित (फिसिकल) गणित पूरी तरह से ट्रैक पर था. मीडिया में बहुत गलत-गलत अटकलें चल रही हैं गर्ग ने कहा कि आरबीआई को 3.6 या 1 लाख करोड़ रुपये सरकार को ट्रांफर करने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है. सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच एकमात्र प्रस्ताव आरबीआई के उचित आर्थिक पूंजी ढांचे को तय करने के लिए फ्रेम वर्क संबंधित द्वारा चर्चा की गई है." बता दें कि गर्ग पूर्व में वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी रह चुके हैं.

क्या RBI और सरकार के बीच इसलिए हुआ टकराव

कई मीडिया रिपोर्ट्स में सरकार और आरबीआई के बीच टकराव का मुख्य कारण सरप्लस राशि से 3.6 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर करना बताया जा रहा था. ऐसी खबरें थी कि वित्त मंत्रालय द्वारा इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव केंद्रीय बैंक को भेजा गया था जिससे RBI ने इंकार कर दिया था. ख़बरों की माने तो मोदी सरकार इस भारी-भरकम राशी से अपने चुनावी बादे को पूरा करने का प्रयास करेगी.

सरप्लस का मतलब..

सरप्लस मतलब किसी देश का पूंजीगत भंडार जो की हमारे देश में कुल 9.59 लाख करोड़ है. केंद्रीय बैंक किसी भी आर्थिक चुनौती या आपातकाल से निपटने के लिए हमेशा सरप्लस की राशी को रिज़र्व रखती है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि सरकार का मानना है कि केंद्रीय बैंक ने पूंजीगत भंडार की आवश्यकताओं का अधिक अनुमान लगाया है जिसके परिणामस्वरूप 3.6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी हुई है.

First published: 9 November 2018, 15:13 IST
 
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