Home » बिज़नेस » Modi government is looking at ONGC for petrol and diesel prices
 

ONGC को और कितना निचोड़ना चाहती है मोदी सरकार ?

सुनील रावत | Updated on: 3 June 2018, 12:13 IST
(PIB )

पेट्रोल और डीजल की कीमतों को कम करने के लिए एनडीए सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है.  सरकार टैक्स में कटौती क्र अपने खजाने को खाली नहीं करना चाहती इसलिए पेट्रोलियम मंत्रालय फिर से इस दबाव से निपटने के लिए तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के दरवाजे की ओर देख रहा है. मीडिया रिपोर्ट में लगातार इस बात पर चर्चा हो रही है कि सरकार उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए टैक्स में कमी करने के बजाय ओएनजीसी पर इसका बोझ डालना चाहती है. 

हालांकि ONGC इस बार सरकार की इस बात से राजी नहीं है क्योंकि कंपनी पहले ही सरकार के कई घाटों को पूरा करने में लगी है और उसका नकद भंडार इसी में पैसे को चुकाने के लिए बोझ बना हुआ है. इससे पहले भी सरकार अपने घाटों को कम करने के लिए ओएनजीसी के भंडार में डुबकी लगा चुकी है. 

इससे पहले सरकार ने करोड़ों के घाटे में चल रही गुजरात सरकार की पेट्रोलियम कंपनी 'गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन' (GSPC) को उबारने की जिम्मेदारी ONGC को दे दी थी. पिछले अगस्त में ओएनजीसी ने जीएसपीसी के केजी बेसिन गैस ब्लॉक में 7,738 करोड़ रुपये में 81  फीसदी हिस्सेदारी ली थी. इसके बाद ओएनजीसी ने एचपीसीएल में सरकार की पूरी हिस्सेदारी को खरीद लिया था.

 

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि ONGC पहले से ही अपने पूंजी व्यय लक्ष्य को पूरा करने के लिए संसाधनों को इकट्ठा करने के लिए संघर्ष कर रहा है. इसके अलावा ओएनजीसी से निकाला गया पैसा पेट्रोल और डीजल की कीमतों कम करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओएनजीसी के चेयरमैन शशि शंकर के साथ इस सप्ताह के शुरू में इस मामले में बात की थी लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.

वित्त मंत्रालय पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए उत्पाद शुल्क में कटौती करने के लिए अनिच्छुक है क्योंकि सरकार को लगता है कि इससे सामाजिक क्षेत्र की कल्याणकारी योजनाओं के फंड पर असर पड़ेगा. सरकार चाहती थी कि पेट्रोल और डीजल की क़ीमत कम करने के लिए विकल्प के रूप में ओएनजीसी को खुदरा विक्रेताओं को सब्सिडी देनी चाहिए ताकि बाजार दरों से कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेचा जा सकें.

2005 में तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि जीएसपीसी के केजी बेसिन ब्लॉक में 20 ट्रिलियन घन फीट (टीसीएफ) गैस थी लेकिन यह दावा सही साबित नहीं हुआ. यहां तक कि सीएजी ने ब्लॉक के निकालने योग्य भंडार पर जीएसपीसी के दावों पर सवाल उठाया. इसके तुरंत बाद ओएनजीसी से एचपीसीएल में सरकार की हिस्सेदारी हासिल करने के लिए कहा गया.

First published: 3 June 2018, 12:09 IST
 
अगली कहानी