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रुपया क्यों हुआ बीमार और किया मोदी को लाचार, अमेरिका वाले ट्रंप हैं जिम्मेदार!

दीपक कुमार सिंह | Updated on: 16 September 2018, 14:11 IST

एक तरफ रुपये में जारी लगातार गिरावट परेशानी का सबब बना हुआ है तो दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल ने मोदी सरकार के ''नाकों में दम'' कर रखा है. रुपये में कमजोरी से चालू खाते का घाटा बढ़ता जा रहा है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह घाटा जीडीपी के 2.4 प्रतिशत तक पहुंच गया.

अगर इसपर तत्काल नियंत्रण नहीं किया गया तो चुनावी साल में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर होगी और भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी की कगार पर आ जाएगी. इस समस्या से निजात पाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आनन-फानन में बैठक कर कई निर्णय लिए.

जानें क्या है चालू खाते का घाटा और रुपये पर असर

चालू खाते का घाटा यानी ''कैड'' देश में आने वाली और देश से बाहर जाने वाली कुल विदेशी मुद्रा के अंतर को कहते हैं. जब कम विदेशी मुद्रा आती है और अधिक मुद्रा प्रवाह बहार जाती है  तो यह घाटे की स्थिति होती है.चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह घाटा जीडीपी के  2.4 प्रतिशत तक पहुंच गया. व्यापार घाटा बढ़ने और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आने से कैड पर दबाव बढ़ रहा है.  

रुपया बीमार..... अमेरिका है जिम्मेदार

अमेरिकी डालर के मुकाबले रुपया 12 सितंबर को रिकार्ड 72.91 तक नीचे गिर गया था. घरेलू मुद्रा अगस्त से लेकर अब तक करीब 6 प्रतिशत टूट गया है. सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. अमेरिका ने चीन से ट्रेड -वॉर छेड़ रखी है. अमेरिकी प्रतिबन्ध के कारण ईरान की अर्थव्यस्था में भी उथल-पुथल जारी है.

और टूटेगा रुपया !

भारत  एक आयातक देश है, हमारे देश को दूसरे देशों से तेल और अन्य सामान खरीदने के लिए अधिकांशतः यूएस डॉलर में भुगतान करना होता है. भारत को अन्य देशों से महंगा तेल आयात करना पड़ेगा और उन्हें डॉलर में ही भुगतान करना होगा जिससे रुपया और टूट जाएगी. देश में महंगाई उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी और भारत आर्थिक मंदी के चपेट में भी आ सकता है.

बता दें कि ईरान तेल के लिए भारतीय करेंसी रुपया में भुगतान लेता है जबकि अन्य देश को डॉलर में पेमेंट करना पड़ता है. डॉलर में  तुर्की में अमेरिका की नीतियों की वजह से आर्थ‍िक संकट जारी है.
 

पीएम ने बैठक में लिए ये निर्णय

विदेशों से कर्ज लेने के नियमों में ढील देने तथा गैर-जरूरी आयातों पर पाबंदी लगाने का बैठक में निर्णय किया. रुपये में गिरावट और बढ़ते चालू खाते के घाटे पर अंकुश लगाने के इरादे से यह कदम उठाया गया है. अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिती की समीक्षा के लिए शुक्रवार को हुए इस बैठक में पीएम मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली के अलावा रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल सहित कई आलाधिकारी मौजूद थे.

पीएम ने RBI गवर्नर उर्जित पटेल और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली. जेटली ने कहा कि इस निर्णय का मकसद चालू खाते के घाटे (कैड) पर अंकुश लगाना तथा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाना है. हालांकि, जेटली ने यह नहीं बताया कि किन जिंसों के आयात पर पाबंदी लगायी जाएगी. उन्होंने कहा, ‘‘बढ़ते कैड पर नियंत्रण के लिये सरकार जरूरी कदम उठाएगी. इसके तहत गैर-जरूरी आयात में कटौती तथा निर्यात बढ़ाने के उपाय किये जाएंगे. आयात में कटौती विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत होगा.’’

First published: 16 September 2018, 14:11 IST
 
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