Home » बिज़नेस » Modi government may got relief from decreasing crude oil price, American relaxation on iran ban may also causes
 

अब नहीं बढ़ेंगे तेल के दाम, ट्रंप-मोदी की दोस्ती ऐसे आई काम

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 November 2018, 16:13 IST

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने देश की जनता के साथ-साथ मोदी सरकार को भी खूब छकाया. तेल के दामों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी थी. लेकिन हाल के दिनों में इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के मुल्य में गिरावट से मोदी सरकार को बड़ी राहत मिली है.

कल यानि बुधवार को ये कीमतें 40 दिनों के सबसे निचले स्तर 65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. गौरतलब है कि 3 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई थी और इस वजह से हमारे देश में पेट्रोल की कीमत 90 रुपये तक के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था.


 

ऐसे आई ट्रंप-मोदी की दोस्ती काम

ऐसा माना जा रहा है कि इस चुनावी साल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को बड़ा तोहफा दिया है. अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए हालिया प्रतिबंधों के बाद इसका प्रभाव तेल की कीमतों पर पड़ने की आशंकाएं जताई जा रही थीं. लेकिन अमेरिका ने भारत सहित 8 देशों को इन प्रतिबंधों से अस्थाई छूट दे दी है. रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप और मोदी के व्यक्तिगत अच्छे रिश्ते का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान है यानि अमेरिकी राष्ट्पति ने प्रतिबंध में राहत देकर अपनी दोस्ती निभाई है. अपने अड़ियल रुख के लिए मशहूर डोनाल्ड ट्रंप की भारत के प्रति नरमी भी इस ओर संकेत देते हैं.

नहीं बढ़ेंगे तेल के दाम

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के उत्पादन में भी वृद्धि हुई है इसलिए अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है. अब देश में डीजल-पेट्रोल के मूल्यों में वृद्धि की संभावना नहीं है.

कम होगा चालू खाते का घाटा

भारत के 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट मोदी सरकार के लिए बड़ी राहत का संकेत मानी जा रही है. गौरतलब है कि भारत सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोर स्थिति को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार दबाव में चल रही है. ऐसे में कच्चे तेल की कम कीमतों से भारत को तेल के लिए कम भुगतान करना होगा. इससे साथ ही भारत का चालू खाते का घाटा (CAD) भी कम होगा.

First published: 15 November 2018, 16:13 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी