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GST और नोटबंदी के बाद मोदी सरकार का सबसे कठोर फैसला, 120 साल पुराने इस कानून में होगा बदलाव!

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 October 2018, 17:12 IST

गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) लागू करने के बाद मोदी सरकार एक और बड़े वित्तीय परिवर्तन की ओर बढ़ रही है. देश में "ईज ऑफ डूइंग बिजनस" को बढ़ाने के लिए सरकार जल्द ही बड़े रिफॉर्म की घोषणा करेगी. केंद्र सरकार डिबेंचर, स्टॉक्स सहित अन्य फाइनेंसियल इंस्ट्रूमेंट के ट्रांसफर पर देशभर में एक समान स्टैंप ड्यूटी दर को लागू करने की तैयारी कर रही है. इसी के साथ लगभग 120 साल पुराना 1899 में बना ये कानून भी निरस्त हो जाएगा.

पिछले साल GST और नोटबंदी के बाद मोदी सरकार का सबसे कठोर फैसला, 120 साल पुराने इस कानून में होगा बदलाव! एक देश, एक टैक्स के तर्ज पर किए गए बड़े बदलाव GST की तरह ही ये भी एक बड़ा कदम होगा. नए आर्थिक सुधार के अंतर्गत सरकार पूरे देश में एक समान स्टैंप ड्यूटी को लागू करना चाहती है. बता दें कि GST ने राज्यों और केंद्रों के दर्जनों टैक्सों को एक कर दिया है.

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, प्रस्ताव तैयार है और राज्यों की भी सहमति है अधिकारी ने ये भी बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए पेश किया जा सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि इस कदम से राज्यों के राजस्व पर असर नहीं पड़ेगा.

गौरतलब है कि स्टैंप ड्यूटी भूमि खरीद से जुड़े लेन-देन या खरीद-विक्री पर लगता है, लेकिन इसे GST के दायरे से बाहर रखा गया था. इंश्योरेंस पॉलिसीज, बिल्स ऑफ एक्सचेंज, चेक, लेडिंग बिल्स, लेटर्स ऑफ क्रेडिट, शेयर ट्रांसफर, इकरार-नामा जैसे वित्तीय ट्रांजैक्शन पर स्टैंप ड्यूटी केंद्र सरकार तय करती है जबकि अन्य वित्तीय साधनों पर स्टैंप ड्यूटी की दर राज्य सरकार निर्धारित करती है.

स्टैंप ड्यूटी में विविधतता की वजह से लोग कम टैक्स वाले राज्यों के जरिए करते हैं. फाइनेंसियल मार्केट रेग्युलटर सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने इससे पहले राज्यों को सलाह दी थी कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन पर स्टैंप ड्यूटीज को एकसमान बनाएं या माफ कर दें. 1899 के इस कानून में हुए बदलाव के लिए प्रयास पहले भी हुए हैं, लेकिन राज्यों ने इसे खारिज कर दिया, क्योंकि स्टैंप ड्यूटी से राज्य के राजस्व का बड़ा स्रोत होता है.

First published: 13 October 2018, 17:12 IST
 
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