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अब इस संस्था की शक्तियों को भी छीनना चाहती है मोदी सरकार ?

सुनील रावत | Updated on: 9 June 2018, 12:10 IST

केंद्र सरकार भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की शक्तियों को ख़त्म करने पर विचार कर रही है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार सरकार प्रतिस्पर्धा आयोग के उल्लंघन के मामले में आदेश सुनाने और जुर्माना लगाने के अधिकार को ख़त्म करना चाहती है. सीसीआई यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियों के विलय से बाजार में किसी एक कंपनी का वर्चस्व कायम न हो.

प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार ये कदम उठाती है तो इससे प्रतिस्पर्धा आयोग बिना दांत की संस्था बनकर रह जायेगा. इसका कदम का मतलब होगा कि आयोग केवल एक सलाहकार प्राधिकारी बन जाएगा और इसका महत्व ही ख़त्म हो जायेगा. रिपोर्ट के अनुसार प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञ आर प्रसाद कहते है कि प्रतिस्पर्धा आयोग की इन शक्ति को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को दी जा सकती है और सीसीआई मामले की जांच करेगा और इसके बारे में आगे की कार्रवाई के लिए सरकार को सिफारिश करेगा.

जानकारों का यह भी कहना है कि सरकार के इस कदम से न्यायिक शक्तियां उनके पास चली जाएगी जिनके पास इस क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं है. हालही में कॉर्पोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा था कि आयोग को एक नियामक की तरह काम करना चाहिए न कि ट्रिब्यूनल या अदालत बनकर. उन्होंने यह भी कहा कि अपनी वकालत की भूमिका निभाने में आयोग को और अधिक काम करने की आवश्यकता है.

हाल ही में सरकार ने कमीशन में सदस्यों की संख्या कम कर छह से तीन कर दी थी. अब कमीशन में एक अध्यक्ष और तीन सदस्य हैं. सरकार अपने वर्कलोड को कम करने के लिए कमीशन को अंशकालिक सदस्यों को देने की योजना भी बना रही है. इन सदस्यों के नीचे आयोग के सचिव, सलाहकार, निदेशक, संयुक्त निदेशक और उप निदेशक के स्तर पर कुल स्वीकृत 91 की 43 रिक्त पद हैं.

जानकारों के अनुसार यह भी देखा गया कि पिछले कुछ वर्षों में सीसीआई द्वारा पारित कुछ आदेश अपीलीय निकाय द्वारा रद्द किए जा रहे हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सीसीआई द्वारा पारित 87 आदेश 2015-16 में अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पास किए गए थे, और यह 2016-17 में 69 और 2017-18 में केवल चार हो गया था.

प्रतिस्पर्धा वकील कहते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि कमीशन ने अपनी जांच को सुव्यवस्थित कर दिया है. कमीशन द्वारा पारित कई आदेश प्रक्रियात्मक आधार पर रद्द कर दिए गए हैं, जो अब नहीं हो रहा है. 2017 में सरकार ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के साथ प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (कम्पैट) का विलय कर दिया.

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First published: 9 June 2018, 12:03 IST
 
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