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राजस्व विभाग के अधिकारियों की आपसी फूट सरकारी खजाने को लगा सकती है चूना

नीरज ठाकुर | Updated on: 31 July 2016, 7:35 IST
QUICK PILL
  • भारतीय राजस्व अधिकारियों के एक समूह ने वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू के खिलाफ बगावत कर दिया है.
  • आईआरएसए ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि राजस्व विभाग जिन अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है वह भारत सरकार की नीतियों के मुताबिक नहीं है. 
  • मामला मुंबई के एक राजस्व अधिकारी से जुड़ा है जिनके खिलाफ कथित तौर पर राजस्व संग्रह लक्ष्य को पूरा करने के मामले मेंं नाजायज तरीकों को अपनाने का आरोप है.

किसने सोचा था कि नरेंद्र मोदी की सरकार को भी सरकारी अधिकारियों की बगावत का सामना करना पड़ेगा? भारतीय राजस्व अधिकारियों के एक समूह ने वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू के खिलाफ बगावत कर दिया है.

आईआरएसए ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि राजस्व विभाग जिन अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है वह भारत सरकार की नीतियों के मुताबिक नहीं है. पूरा मामला मुंबई के एक राजस्व अधिकारी से जुड़ा है जिनके खिलाफ कथित तौर पर राजस्व संग्रह लक्ष्य को पूरा करने के मामले में नाजायज तरीकों को अपनाने का आरोप है.

आरोपी अधिकारी ने 30 मार्च 2016 को एसबीआई से 10,000 करोड़ रुपये की मांग की थी. बैंक से अग्रिम कर के तौर पर 4,900 करोड़ रुपये का भुगतान करना था लेकिन अधिकारी ने केवल 1,200 करोड़ रुपये को ध्यान में रखते हुए कम भुगतान के एवज में बैंक पर 5,800 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया. अधिकारी ने यह काम कर संग्रह के लक्ष्य को पूरा करने के लिए किया.

1 अप्रैल 2016 को अधिकारी ने एक रेक्टिफिकेशन ऑर्डर पास किया और फिर एसबीआई को 9,500 करोड़ लौटा दिए.

क्या कहते हैं कर अधिकारी?

राजस्व सेवा के एक अधिकारी ने अपना नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया, 'हमारा लक्ष्य राजस्व विभाग ने तय किया था. इसे नहीं पूरा किए जाने को लेकर हमारी खिंचाई भी हुई थी. इतना बड़ा लक्ष्य तय करने के लिए कौन जिम्मेदार है?'

सरकार का 2015-16 का कर संग्रह का लक्ष्य पूरा हो चुका है. सरकार को लक्ष्य से 5,000 करोड़ रुपये अधिक कर मिले और यह बढ़कर 14.60 लाख करोड़ रुपये हो गया. अधिकारी की माने इसमें बड़ी रकम इन्हीं तरीकों से हासिल की गई है.

मोदी सरकार लगातार टैक्स टेररिज्म को खत्म करने की बात करती रही है जिसकी वजह से कंपनियों से अधिक कर की मांग की जाती रही है.

क्या होगा असर?

सरकार ने इंडियन रेवेन्यू सर्विस एसोसिएशन मुंबई की तरफ सेे पारित किए गए प्रस्ताव के खिलाफ सख्त बयान दिया है. सरकार ने इसे 'अवज्ञा' करार दिया है. हालांकि यह मामला जल्द खत्म नहीं होने जा रहा है. दोनों सरकारी विभागों के बीच झगड़ा बढ़ने की संभावना है.

मोदी सरकार कर चुराने वाले लोगों पर दबाव डालकर कर संग्रह को बढ़ाना चाहती है. सरकार की योजना उन लोगों पर दबाव डालकर उन्हें संपत्ति का खुलासा करने के लिए बाध्य करना है. मोदी सरकार की पूरी कोशिश काला धन को रोकने की है. वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री दोनों ही सख्त शब्दों में कर नहीं देने वालों को चेतावनी दे चुके हैं.

लेकिन जिस तरह से राजस्व विभाग के अधिकारी आपस में भिड़ रहे हैं, वैसे में राजस्व विभाग के लिए कर चोरों के खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल है. साथ ही कर अधिकारियों के आपसी झगड़े की वजह से सालाना कर संग्रह का लक्ष्य भी गिर सकता है.

सरकार के अति अहम विभाग में इस तरह की बगावत राजस्व संग्रह के लिहाज से ठीक नहीं है. उसे जल्द ही इस मामले को सुलझाना होगा, वरना इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे.

First published: 31 July 2016, 7:35 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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