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जीएसटी, मानसून और निर्यातः शायद एनडीए के लिये ‘अच्छे दिन’ आ रहे हैं?

नीरज ठाकुर | Updated on: 21 July 2016, 7:56 IST

बीते दो वर्षों से भारतीय अर्थव्यवस्था खराब मानसून, वैश्विक अर्थव्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के अलावा संसद में जीएसटी और भूमि अधिग्रहण विधेयक जैसे सुधार वाले महत्वपूर्ण विधेयकों पर विपक्ष को साथ लेने में सरकार की विफलता के चलते डांवाडोल स्थितियों से दो-चार होती रही है.

लेकिन स्थितियां अब बदलती हुई नजर आ रही हैं. दो वर्षों के लगातार सूखे के बाद इस वर्ष मानसून पूरे देश पर मेहरबान है और भारतीय मौसम विभाग की भविष्यवाणी को सच करते हुए पूरे देश में सामान्य औसत के मुकाबले 106 प्रतिशत बारिश हो रही है.

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इसका सीधा सा मतलब यह है कि कृषि गतिविधियों पर आधारित देश की ग्रामीण आबादी के करीब 58 प्रतिशत हिस्से (2012-13 के एनएसएसओ के आंकड़ों के अनुसार) के लिये यह वर्ष बेहतर रहने की उम्मीद है जिसके चलते देश के आर्थिक विकास के और बेहतर होने की आशा की जा रही है.

दूसरी अच्छी खबर यह है कि बीते 19 महीनों से उत्पादों के निर्यात में लगातार आ रही गिरावट में भी बेहद कम ही सही लेकिन 1.27 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है जो जून 2016 में बढ़कर 22.6 बिलियन डाॅलर तक पहुंच गया है.

यह तथ्य यह देखते हुए और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि जून के महीने में चीन का निर्यात 4.8 प्रतिशत गिरा है.

अगर सबकुछ सामान्य रहता है तो इस बात की पूरी उम्मीद है कि सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को भी सफलतापूर्वक पास करवाने में सफल रहेगी.

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हालांकि वर्ष 2015-16 के दौरान भारतीय अर्थव्यस्था के कथित तौर पर 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने, जो चीन की दर से भी अधिक है, के बावजूद सरकार के दावों में कोई दम नहीं दिखा और विभिन्न सूक्ष्म संकेतकों में से भी कई नकारात्मक जोन में थे.

उदाहरण के लिये भारत में 1.35 लाख नौकरियों के साथ 2009 के बाद सबसे कम रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ (2009 मे नौकरी डाटा का संग्रह करना प्रारंभ किया गया). आरबीआई गवर्नर के अनुसार वर्ष 2015-16 में अधिकांश निर्माण कंपनियां अपनी क्षमता का सिर्फ 70 प्रतिशत की काम कर रही थीं. और इसी वजह से कंपनियां अपने कारखानों में नई नौकरियों का सृजन करने में असमर्थ थीं.

हालांकि इस बात की पूरी उम्मीद है कि अच्छे मानसून के चलते देश में औद्योगिक और उपभोक्ता उपयोग की वस्तुओं की मांग में बढ़ोतरी होगी जो कंपनियों को अपनी क्षमता में विस्तार करने और नई नौकरियों का सृजन करने के लिये प्रेरित करेगी.

अधिक नौकरियों का सीधा मतलब होगा सामान खरीदने के लिये अधिक पैसे का खर्च होगा जिससे आर्थिक गतिविधियों का एक चक्र शुरू होगा जो भारत की जीडीपी को और अधिक गति देगा.

इसके अलावा 2014 से अप्रैल 2016 के बीच कपड़ा, चमड़ा और इंजीनियरिंग जैसे निर्यात वाले गहन श्रम आधारित क्षेत्रों में गिरते हुए निर्यात के फलस्वरूप बड़ी संख्या में नौकरियों में गिरावट दर्ज की गई. अगर निर्यात का क्षेत्र लगभग वर्ष भर मंदी की चपेट से बाहर आने में सफल रहता है तो छोटे और मध्यम उद्यम के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है. एक बार फिर इसके फलस्वरूप एफएमजीसी और घरेलू उपयोग के उत्पादों की मांग में वृद्धि होगी.

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आखिर में राज्यों के वित्त मंत्रियों द्वारा माॅडल जीएसटी कानून का समर्थन करने की घोषणा कर देने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आखिरकार जीएसटी बिल को लेकर राज्यसभा में पांच घंटे लंबी बहस के लिये सहमत हो गई है.

इस बात की पूरी उम्मीद है कि यह बहस संसद के चालू मानसून सत्र में जीएसटी विधेयक के पारित होने के लिये नींव रखने का काम करेगी.

इस बात की पूरी उम्मीद है कि देश में एक बार एकीकृत कर प्रणाली के लागू होने के बाद विदेशी निवेशकों में खुशी की लहर फैल जाएगी और वे तुरंत भारतीय अर्थव्यवस्था में अपना पैसा लगाएंगे. संभावना है कि अगले वर्ष से देश में जीएसटी लागू होने के बाद इसके चलते देश की अर्थव्यवस्था में 1-2 प्रतिशत की बढ़त होने होगी.

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मोदी सरकार के पहले दो वर्ष राजनीतिक रूप से खासे विवादास्पद रहे क्योंकि सरकार कई ऐसे विभिन्न मुद्दों पर अपना नियंत्रण रखने में नाकामयाब रही जिनके चलते उसकी छवि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी धूमिल हुई. हालांकि इससे भी बड़ी चिंता का विषय ऐसे भरोसेमंद आर्थिक आंकड़ों की कमी भी रहा जिन्होंने भारी बहुमत से देश की सत्ता संभालने वाली सरकार से उसकी चमक छीन ली.

अगर सबकुछ ठीक रहता है तो हो सकता है कि पूरे देश की स्थितियों-परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिले और एनडीए को दोबारा वह विश्वास मिल सके जो लोकसभा में 336 सीट मिलने वाली सरकार में दिखना चाहिये.

First published: 21 July 2016, 7:56 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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