Home » बिज़नेस » More govt vs Reliance arbitration? Shah report rules against RIL in KG-D6 row
 

केजीडी 6 बेसिनः सरकार और रिलायंस के बीच एक और तकरार

नीरज ठाकुर | Updated on: 3 September 2016, 7:33 IST

मुकेश अम्बानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को एक और झटका लगा है. सरकार ने आरआईएल के खिलाफ ओएनजीसी की शिकायत की जांच करने के लिए एपी शाह पैनल बिठाया था. ओएनजीसी का आरोप है कि आरआईएल ने केजी डी-6 बेसिन में स्थित उसके गैस भण्डार में से गैस चोरी कर ली है. पैनल ने ओएनजीसी के दावे को सही ठहराया है.

बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार के मुताबिक हालांकि यह मामला ओएनजीसी द्वारा शिकायत करने पर ही सामने आया है, शाह पैनल ने कहा कि ओएनजीसी को इसके एवज में मुआवजा मांगने का कोई अधिकार नहीं है और न ही आरआईएल के खिलाफ उक्त दावा करने का, क्योंकि उन प्राकृतिक गैस भंडारों पर कोई मालिकाना हक नहीं है.

इसका मतलब है आरआईएल से इस गैस का पैसा मांगने का हक भारत सरकार को है. सरकार यह पैसा रिलायंस द्वारा केजी डी-6 बेसिन में ओएनजीसी को आवंटित गैस ब्लॉक में से अनाधिकृत रूप से गैस निकालने के लिए लेगी, जिससे आरआईएल ने नाजायज फायदा उठाया है.

परन्तु यह कौन तय करेगा कि जुर्माना क्या लगाया जाए?

एपी शाह पैनल समुचित आंकड़ों के अभाव में आरआईएल से वसूली जाने वाली राशि नहीं बता पा रहा है. ओएनजीसी ने अपनी शिकायत में आरआईएल द्वारा ली गई गैस की कीमत 2013 में प्राकृतिक गैस की दर 4.2 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से 11 हजार करोड़ रूपए बताई है.

चूंकि शाह पैनल ओएनजीसी के दावों का संज्ञान नहीं ले रहा है, इसलिए यह सरकार के साथ बातचीत के एक और दौर में तय किया जाएगा कि सरकार को आरआईएल से कितनी पेनाल्टी वसूलनी चाहिए.

विवाद यह है

2013 में ओएनजीसी ने दावा किया कि आरआईएल ने जानबूझ कर उसके क्षेत्र के निकटवर्ती गैस के कुओं से अच्छी खासी मात्रा में अनधिकृत तौर पर गैस निकाल ली. जब आरआईएल ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया तो ओएनजीसी ने मई 2015 में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

2013 में जब ओएजीसी ने उक्त आरोप लगाया था, तब आरआईएल ने ओएनजीसी के आरोपोें का खंडन करते हुए कहा कि ओएनजीसी के आरोप निराधार हैं क्योंकि तकनीकी तौर पर यह संभव नहीं है कि हम नजदीकी किसी क्षेत्र से गैस निकाल लें. यह भी दावा किया गया है कि आरआईएल ने हाइड्रोकार्बन निदेशालय (डीजीएच) की ओर से स्वीकृत क्षेत्र विकास योजना के अनुसार ये गैस निकाली.

विवाद के हल के लिए डीजीएच ने दोनों ही पक्षों आरआईएल और ओएनजीसी की सहमति से एक अमेरिकी परामर्शदात्री फर्म डी गोयल एंड मैकनॉटन को नियुक्त किया है कि वह दोनों कम्पनियों द्वारा किए जा रहे दावों की सत्यता की जांच करे.

फर्म ने अपनी रिपोर्ट में ओएनजीसी के जी-4 बलॉक और आरआईएल के केजी डी-6 के बीच ‘सम्पर्क’ पाया. अनुमानों के अनुसार आरआईएल ने 31 मार्च 2015 तक संयुक्त गैस कुओं से 58.7 खरब क्यूबिक मीटर गैस निकाल ली थी. इसमें से 11.9 खरब क्युबिक मीटर गैस ओएनजीसी की हो सकती है.

एक और मामला

पिछले कुछ सालों से केजी डी-6 बेसिन क्षेत्र, जिसे देश में गैस का सर्वोत्तम उत्पादक माना जाता है, नकारात्मक वजहों से खबरों में है. उस क्षेत्र में अवैध तरीके से गैस निकालने के और भी कई मामले विचाराधीन हैं, जहां सरकार और आरआईएल वादी हैं.

आरआईएल के लम्बित मामले

2011 में कैग की एक रिपार्ट आई थी, जिसमें आरआईएल पर आरोप लगाया गया था कि वह अपने उत्पादन साझेदारी अनुबंध का उललंघन कर रहा है और केजी डी-6 के विकास पर आने वाले पूंजी व्यय को कुछ ज्यादा आकलन कर रहा है.

इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने आर्रआएल को इन क्षेत्रों के गैस बेचने पर आने वाला खर्च 2.3 अरब डॉलर का पुनर्भुगतान करने से इनकार कर दिया है. रिलायंस ने 23 नवम्बर 2011 को कानूनी नोटिस भेज कर यह राशि देने का दावा किया था. मामला अब तक लम्बित है.

2014 में आर्रआएल ने सरकार के खिलाफ एक और वाद दायर किया था, जिसमें कहा गया है कि सरकार ने एक अप्रैल 2014 से प्राकृतिक गैस की कीमतें नहीं बढाई हैं. एक बार सरकार आरआईएल और ओएनजीसी के बीच इस विवाद का समाधान करने के लिए जुर्माने की रकम तय कर दे तो आशंका है कि सरकार और मुकेश अंबानी की आरआईएल के बीच एक और कानूनी विवाद खड़ा हो जाएगा.

First published: 3 September 2016, 7:33 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी