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अमेरिका ने जिस ड्रोन से क़ासिम सुलेमानी को मारा उसे भारत भी करना चाहता है हासिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 January 2020, 15:24 IST

3 जनवरी को अमेरिका ने इराक में ईरानी सैन्य कमांडर क़ासिम सुलेमानी को मार गिराया. जिसके बाद ईरान ने कहा कि वह अमेरका से इसका बदला लेगा. ईरानी मीडिया में खबर आयी है कि अमेरिका ने सुलेमानी को मारने के लिए अपने मानव रहित विमान एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का इस्तेमाल किया था. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत ने भी इस हेलफायर मिसाइल को हासिल करने के लिए बातचीत की है.

2015 में इस ड्रोन का इस्तेमाल सीरिया में आईएसआईएस के आतंकी मोहम्मद इवाजी उर्फ जिहादी जॉन ’को मारने के लिए किया गया था. एमक्यू -9 रीपर ड्रोन को दुनिया में सबसे घातक माना जाता है. न केवल इसकी गति और मारक क्षमता के बल्कि इसकी कई वजह हैं.


भारत भी करना चाहता है हासिल

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने हाल ही में अरबों डॉलर के अमेरिकी रक्षा उपकरण खरीदे हैं और भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं के उपयोग के लिए इस मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) से लैस करने के लिए अमेरिका के साथ लंबे समय से बातचीत भी कर रहा है. भारतीय वायु सेना (IAF) ने सितंबर 2019 में 22 अपाचे हेलिकॉप्टरों के पहले बैच को शामिल किया था.

अपाचे हेलीकॉप्टरों के एएच -64 संस्करण को सबसे उन्नत कहा जाता है जो सभी तरह के मौसम की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है. रीपर ड्रोन एक यूएवी है जो आर्म मल्टी ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिका ने भारत को "मेजर डिफेंस पार्टनर" के रूप में नामित किया है, ताकि वह अपने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए भारत के अभियान को पूरा करने के लिए सैन्य उपकरणों के अधिग्रहण के लिए तेजी से बातचीत की सुविधा दे सके.

2001 में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज की, जो 1980 के दशक के बाद से अमेरिकी सैन्य विमान की एक अन्य प्रधान मिसाइल थी. रीपर ड्रोन जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स द्वारा विकसित किया गया है. इसके 66 फीट लंबे पंख है और यह लगभग 230 मील प्रति घंटे (482 किलोमीटर प्रति घंटे) की क्षमता के साथ यूएवी निगरानी भी कर सकता है. यह खोज और बचाव मिशन में सहायता कर सकता है.

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रीपर ड्रोन के लिए भारत की कोशिश 2016 में शुरू हुई. शुरुआत में भारत का इरादा भारतीय नौसेना के लिए सी गार्जियन कहे जाने वाले प्रीडेटर बी ड्रोन के 22 नौसेना वेरिएंट का अधिग्रहण करना था. 2019 में ब्रेकिंग डिफेंस वेबसाइट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पेंटागन और भारतीय रक्षा मंत्रालय सभी तीन सशस्त्र सेवाओं द्वारा उपयोग के लिए प्रिडेटर बी रीपर ड्रोन के मानकीकृत संस्करणों के साथ मिलकर काम कर रहे थे. रीपर ड्रोन भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.

 
First published: 8 January 2020, 15:09 IST
 
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