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क्या मोदी सरकार के नए FDI नियम मुकेश मुकेश अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए हैं ?

सुनील रावत | Updated on: 6 February 2019, 15:43 IST

मॉर्गन स्टैनली ने हालही में एक अनुमान में कहा है कि भारत में मोदी सरकार के नए एफडीआई नियमों के चलते अमेरिकी कंपनी वालमार्ट फ्लिपकार्ट से अपने हाथ पीछे खींच सकती है. यही नहीं अमेज़न ने भी नए एफडीआई नियमों का विरोध किया था. हालांकि इसके पीछे तर्क यह भी दिया जा रहा है कि इन नियमों से खुदरा व्यापारियों को लाभ होगा. भारत में ऑनलाइन खरीदारी के 70 प्रतिशत बाजार पर वर्तमान में अमेज़न और फ्लिपकार्ट का कब्ज़ा है.

हालांकि कई लोग यह भी मान रहे हैं कि छोटे व्यापारियों की रक्षा करने के उद्देश्य से सख्त नियम, देश के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी को लाभ पहुंचा सकते हैं. जिन्होंने हालही में अपना ई कॉमर्स प्लेटफार्म शुरू करने की घोषणा की थी. भारतीय जनता पार्टी बीते दिनों तीन प्रमुख राज्यों में चुनाव हार गई थी. माना जा रहा था कि इस हार का कारण खुदरा कारोबारियों की नाराजगी भी थी. 2016 नोटबंदी और एक नए बिक्री कर के बाद के जीएसटी रोलआउट ने इन व्यापारियों को बड़ा नुकसान पहुंचाया.

वहीं अंबानी दूरसंचार, फाइबर-टू-होम ब्रॉडबैंड, मीडिया और मनोरंजन, और खुदरा कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं. टेलिकॉम कंपनी जियो के आने के बाद कई टेलिकॉम कंपनियों का करोबायर बंद हो गया था. यूबीएस के विश्लेषकों का अनुमान है कि रिलायंस नए जमाने के रिटेल में बाजार में हिस्सेदारी हासिल कर सकता है, जिसमें 280 मिलियन टेलीकॉम सब्सक्राइबर्स, एक ब्रॉडबैंड ऑफरिंग, व्यापक कंटेंट और देश भर में 10,000 स्टोर्स की एक वेब साइट दी गई है.

कंपनी वितरण और वितरण केंद्र बनाने के लिए भारत की 12 मिलियन दुकानों के साथ साझेदारी करना चाहती है. अमेरिकी खुदरा दिग्गजों को एक ऐसे बाजार में बंद किया जा रहा है, जहां उन्होंने अरबों डॉलर कमाए हैं. मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, फ्लिपकार्ट का नुकसान 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. जानकार मानते हैं कि रिलायंस संभवत: ई-कॉमर्स में उतरने लिए सरकार के सख्त नियमों से उत्पन्न अवसर का उपयोग करेगा. अंबानी ने पिछले महीने ही अपनी रणनीति की शुरुआत की थी, जिसमें पश्चिमी भारत के 1.2 मिलियन स्टोर मालिकों को एक शॉपिंग प्लेटफॉर्म शामिल करना था.

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First published: 6 February 2019, 15:31 IST
 
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