Home » बिज़नेस » NCLAT puts RCom's insolvency on hold, big gift for anil ambani before upcoming birthday
 

अनिल अंबानी को जन्मदिन से 8 दिन पहले मिला बड़ा तोहफा, NCLAT ने सुनाया बड़ा फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 May 2018, 19:03 IST
बिजनेस टायकून अनिल अंबानी को अाने वाले जन्मदिन से पहले बड़ी राहत मिली है. कर्ज को बोझ तले अनिल अंबानी दिवालिया होने की कगार पर हैं. लेकिन नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के एक फैसले ने उनकी बड़ी मदद की है. आठ महीने से इस विवाद की सुनवाई  (एनसीएलएटी) कर रहा था.
 
एरिक्सन के साथ चल रहा था आरकॉम का विवाद
भारी कर्ज में दबी अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और एरिक्सन के बीच पिछले आठ महीने से चल 550 करोड़ रुपये का विवाद चल रहा था. एरिक्सन ने  रिलायंस कम्यूनिकेशन के खिलाफ दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता आदेश हासिल किया था.
 
इस विवाद पर आज फैसला एनसीएलटी ने सुनाया. इस फैसले के बाद अनिल अंबानी की कंपनी को दिवालिया के रास्ते से नहीं गुजरना होगा. अब अनिल अंबानी की कंपनी अपने वायरलेस कारोबार को बड़े भाई मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो को बेचकर अपना कर्ज चुका सकेगी. इस खबर के बाद शेयर बाजार से भी आरकॉम के लिए खुशियां आई.  आज आर कॉम के शेयर में मंगलवार को 9 फीसदी की उछाल दर्ज की गई.
क्या है पूरा मामला

अनिल अंबानी की कंपनी आर कॉम पर एरिक्सन का करीब 1,000 करोड़ रुपये का बकाया है. इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में सुनवाई थी. आरकॉम के पक्ष में फैसला आने के बाद अनिल अंबानी को एरिक्सन का बकाया चुकाने के लिए 120 दिन का समय मिल गया है. इससे पहले चेयरमैन न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाले पीठ ने दोनों पक्षकारों को आपस में विवाद को निपटाने की सलाह दी थी.

एरिक्सन ने दायर की थी याचिका

एरिक्सन ने पिछले साल सितंबर में एरिक्सन ने 11.5 अरब रुपये की वसूली की खातिर एनसीएलटीके मुंबई पीठ में याचिका दाखिल कर आरकॉम के परिसमापन की मांग की थी. दिसंबर 2017 में आरकॉम पर लेनदारों का करीब 460 अरब रुपये बकाया था और इसने अपने लेनदारों के साथ कर्ज पुनर्गठन कार्यक्रम का प्रस्ताव किया था.
 
इस योजना में संपत्ति मुद्रीकरण योजना शामिल थी, जिसके तहत मोबाइल टाबर, स्पेक्ट्रम और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की बिक्री रिलायंस जियो इन्फोकॉम को 170 अरब रुपये में की जाएगी. लेकिन तीनों कंपनियों के आईबीसी के दायरे में चलते कर्ज पुनर्गठन योजना पर विराम लग गया, ऐसे में कंपनी के परिसमापन का जोखिम बढ़ गया.
First published: 30 May 2018, 19:03 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी