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रतन टाटा ने जीता मिस्त्री के खिलाफ केस, NCLT ने कहा नहीं हुआ नियमों का उल्लंघन

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 July 2018, 11:49 IST
(फोटो क्रेडिट : इंडियन एक्सप्रेस )

टाटा संस ने सायरस मिस्त्री के खिलाफ मामला जीत लिया है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने टाटा संस के पक्ष में फैसला दिया है. एनसीएलटी ने अपने आदेश में कहा कि बोर्ड के पास पद से हटाने का अधिकार है. CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार एनसीएलटी ने रतन टाटा के खिलाफ लगाए गए आरोप को खारिज किया है. मिस्त्री ने टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में खुद को हटाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी. टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में मिस्त्री परिवार की 18% से अधिक हिस्सेदारी है, हालांकि वोटिंग राइट्स के साथ होल्डिंग केवल 4% से कम है.

रतन टाटा के सेवानिवृत्ति की घोषणा के बाद 2012 में मिस्त्री ने टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था. टाटा संस के छठे चेयरमैन मिस्त्री को अक्टूबर 2016 में पद से हटा दिया गया था. दो महीने बाद मिस्त्री और उनके परिवार द्वारा संचालित निवेश कंपनी साइरस इंवेस्टमेंट्स ने टाटा संस और अन्य के खिलाफ अल्पसंख्यक शेयरधारकों के रूप में एनसीएलटी से संपर्क किया था और रतन टाटा पर उत्पीड़न और कुप्रबंधन का आरोप लगाया था.

कंपनी अधिनियम के तहत दायर याचिका में मिस्त्री ने दावा किया कि उनका निष्कासन बोर्ड के ट्रस्टियों के खराब प्रबंधन और समूह के अल्पसंख्यक शेयरधारकों के उत्पीड़न का परिणाम था. मिस्त्री ने अपनी याचिका में दावा किया कि अध्यक्ष के रूप में उनका निष्कासन बिना किसी कारण किया गया.

अध्यक्ष के रूप में मिस्त्री के निष्कासन के पांच महीने बाद मिस्त्री को टाटा संस बोर्ड के निदेशक पद से हटा दिया गया. टाटा समूह ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि मिस्त्री को हटाने के पीछे कारण था क्योंकि बोर्ड ने उस पर विश्वास खो दिया था. टाटा समूह ने तर्क दिया कि कानून स्पष्ट रूप से एक अध्यक्ष को हटाने की अनुमति देता है और मिस्त्री को हटाने के लिए 9 में से 7 ने समर्थन किया था.

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First published: 9 July 2018, 11:42 IST
 
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