Home » बिज़नेस » New Aviation Policy May Hurt Incumbent Indian Airlines
 

मौजूदा एयरलाइंस कंपनियों के लिए झटका है नई एविएशन पॉलिसी

अभिषेक पराशर | Updated on: 16 June 2016, 8:59 IST
QUICK PILL
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई एविएशन पॉलिसी को मंजूरी दे दी. नई नीति के लागू होने के बाद विमानन कंपनियों को सीधे विदेशी उड़ान भरने की अनुमति होगी. 
  • अभी तक घरेलू स्तर पर पांच साल उड़ान भरने के बाद ही किसी कंपनी को विदेशी रूट पर विमान उड़ाने की अनुमति मिलती थी. मौजूदा विमानन कंपनियां इंडिगो (इंटर ग्लोबल एविएशन लिमिटेड), जेट एयरवेज, स्पाइस जेट और गो एयर इस नीति का विरोध कर रहे थे. 
  • मंत्रालय ने इन कंपनियों के विरोध के दरकिनार करते हुए 5/20 नियम को रद्द कर दिया है. इस नियम के मुताबिक भारत की विमानन कंपनी को पांच साल तक घरेलू मार्ग पर उड़ान भरने के बाद ही विदेशी फ्लाइट की अनुमति मिलती थी. इसके अलावा उनके पास बेड़े में कम से कम 20 विमानों का होना भी जरूरी था.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई एविएशन पॉलिसी को मंजूरी दे दी. मंत्रिमंडल ने कुछ छोटे बदलाव के साथ नई नीति को हरी झंडी दी है. नई नीति के लागू होने के बाद विमानन कंपनियों को सीधे विदेशी उड़ान भरने की अनुमति होगी. 

अभी तक घरेलू स्तर पर पांच साल उड़ान भरने के बाद ही किसी कंपनी को विदेशी रूट पर विमान उड़ाने की अनुमति मिलती थी. इसके अलावा उनके पास बेड़े में कम से कम 20 विमानों का होना भी जरूरी था. इसे 5/20 नियम कहा जाता था.

इंडिगो (इंटर ग्लोबल एविएशन लिमिटेड), जेट एयरवेज, स्पाइस जेट और गो एयर जैसी विमानन कंपनियां इस नीति का विरोध कर रही थीं. लेकिन मंत्रालय ने इन कंपनियों के विरोध के दरकिनार कर दिया. विस्तारा और एयर एशिया जैसी नई एयरलाइन इस नियम रद्द करने के लिए लॉबीइंग कर रही थी. सरकार के इस फैसले से घरेलू स्तर पर विमानों की सेवा में बढ़ोतरी होगी, जिसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को होगा.

इंडिगो, जेट एयरवेज, स्पाइस जेट और गो एयर नई एविएशन नीति का विरोध कर रहे थे

नई विमानन पॉलिसी में 5/20 नियम को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ पुरानी विमानन कंपनियों ने अदालत में जाने की धमकी दी है. नवंबर 2014 में इस नीति को सामने रखा गया था और फिर इसे अक्टूबर 2015 में संशोधित किया गया. कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद की वजह से एविएशन पॉलिसी की घोषणा में देरी हुई. 

हालांकि विमान से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए नई विमानन नीति वरदान की तरह है. नई नीति में हवाई यात्रियों के हितों का ज्यादा ख्याल रखा गया है.

हवाई यात्रियों को राहत

सरकार ने निमयों में बदलाव कर घरेलू उड़ानों को प्रोत्साहित किया है. घरेलू टिकट कैंसिल करवाने की स्थिति में यात्रियों को 15 दिनों के भीतर रिफंड मिलेगा. वहीं अंतरराष्ट्रीय टिकट को कैंसिल किए जाने के मामले में विमानन कंपनियों को 30 दिनों के भीतर यात्रियों का पैसा लौटाना होगा.

विमानन कंपनियों के लिए अब फ्लाइट कैंसल करना बेहद मुश्किल हो गया है. अचानक से फ्लाइट कैंसिल किए जाने की स्थिति में एयरलाइंस को यात्रियों को 400 फीसदी तक जुर्माना देना होगा. 

अभी तक यात्री अपने साथ 15 किलो सामना ले जा सकते थे. इससे अधिक वजन होने पर कंपनियां प्रति किलोग्राम 300 रुपये वसूलती थीं, जिसे अब घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है.

तेजी से बढ़ता एविएशन मार्केट

भारत का एविएशन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. फिलहाल भारत दुनिया का नौंवा बड़ा एविएशन मार्केट है और एक अनुमान के मुताबिक 2020 तक भारत दुनिया का तीसरा बड़ा एविएशन हब होगा.

40 देशों से जुड़े घरेलू और विदेशी एयरलाइंस कंपनियों के नेटवर्क ने 2015 में भारतीय हवाई अड्डों से 18 करोड़ यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया. हालांकि इसके बावजूद भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां हवाई सेवा की पहुंच न्यूनतम है.

अमेरिका में प्रति व्यक्ति हर साल औसतन दो बार हवाई यात्रा करता है जबकि भारत में यह औसत 0.04 है. वहीं चीन में यह औसत 0.3 है. पर्यटन, व्यापार और यात्राओं में हुई बढ़ोतरी की वजह से भारत में हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ी है. इसी कारण लंबे समय से एविएशन रिफॉर्म की मांग की जा रही थी.

एविएशन के लिहाज से भारतीय बाजार में छिपी संभावनाओं का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2020 तक भारत में कुल हवाई यात्रियों की संख्या 42.1 करोड़ होने का अनुमान है.

जरूरी था सुधार

प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी सरकार ने स्मार्ट सिटी और  नए इकनॉमिक कॉरिडोर को बढ़ावा दिया है. सरकार ने संभावित इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को देखते हुए कनेक्टिविटी की योजना में बदलाव किया है. सरकार की योजना 100 स्मार्ट सिटी बनाने की है.

मोदी सरकार की नई एविएशन नीति इन्हीं नीतिगत बदलावों के मुताबिक है. सरकार ने 50 से अधिक नए एयरपोर्ट और मौजूदा हवाई अड्डों के विस्तार की योेजना बनाई है और उसकी योजना अगले एक दशक में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और एविएशन नैविगेशन सिस्टम के क्षेत्र में 120 अरब डॉलर से अधिक की रकम निवेश करने की है.

छोटे शहरों के लिए विमानन सुविधाएं, पूर्वोत्तर भारत में बेहतर कनेक्टिविटी के साथ मध्य वर्ग के खर्च करने की क्षमता में हो रही बढ़ोतरी आने वाले दिनों में भारत के विमानन इंडस्ट्री के ग्रोथ को  मजबूती मिलने की उम्मीद है.

बाजार पर नजर

अक्टूबर 2012 में एयर एशिया ने कहा था कि अगर भारत में एविएशन इंडस्ट्री और बजट एयरलाइंस के लिए माहौल ठीक रहा तो वह यहां के बाजार में अपनी मौजूदगी को पुख्ता करेंगे. 

बाद में जब सरकार ने विमानन कंपनियों में 49 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दी, तब एयर एशिया के सीईओ टोनी फर्नांडीज ने ट्वीट कर कहा कि अब उनके लिए भारत में काम करना ज्यादा आसान होगा. 

एयर एशिया के साथ ही टाटा ने एक बार फिर से एविएशन बाजार में कदम रखा. नई एविएशन पॉलिसी में बदलाव के लिए सबसे ज्यादा लॉबीइंग इन्हीं दोनों कंपनियों ने की थी.

स्टॉक में तेजी

नई एविएशन पॉलिसी की घोषणा के बाद इंडिगो, स्पाइसजेट और जेट एयरवेज के शेयरों में तेजी आई. बीएसई में पिछले साल लिस्ट हुई इंडिगो के शेयर करीब दो फीसदी की उछाल के साथ बंद हुए जबकि स्पाइसजेट के शेयर में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

एविएशन स्टॉक्स में आई तेजी की वजह वैश्विक स्थितियां रहीं. अमेरिकी में भंडार बढ़ने और यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के बाहर निकलने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमत में जोरदार गिरावट आई है.

अंतरराष्ट्र्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम तीन हफ्तों के निचले स्तर पर आ गया है. विमानन कंपनियों के दिनों दिन के ऑपरेशन में कच्चे तेल की लागत सबसे अधिक होती है.

आईसीआरए की स्टडी के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट की वजह से भारत की विमानन कंपनियों का घाटा 2014-15 के 70,000 करोड़ रुपये के मुकाबले 2015-16 में घटकर 58,000-60,000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है. वित्त वर्ष 2015-16 में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 28 फीसदी की गिरावट आई है. 

First published: 16 June 2016, 8:59 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी