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1 अप्रैल से बदल जाएंगे टैक्स के ये नियम, जानें क्या होगा आपकी जिंदगी पर इसका असर

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 March 2019, 13:09 IST

1 फरवरी 2019 को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था. इस अंतरिम बजट 2019 में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव के साथ-साथ छोटे किसानों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के फायदे के लिए कई तरह के प्रावधान लाए गए थे. छोटे करदाताओं और आवासीय संपत्तियों के मालिकों को राहत देने के लिए आयकर नियमों में भी बदलाव किए हैं जो कि 1 अप्रैल 2019 से प्रभावी हो जाएगा.

आम लोगों की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ेगा. नौकरी पेशा और छोटे कारोबारियों को आयकर में राहत मिलेगी तो कुछ चीजें महंगी हो जाएंगी. अंतरिम बजट में महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर एक आगे जानकारी दी जा रही है जिसे जानना आपके लिए महत्वपूर्ण होगा.

5 लाख तक की आय टैक्स फ्री

केंद्र सरकार ने अंतरिम बजट 2019 में 5 लाख रुपये की टैक्सेबल आय को टैक्स फ्री कर दिया है. अगर आपकी सालाना आमदनी 5 लाख रुपये तक की है तो आपको इनकम टैक्स देने की जरूरत नहीं होगी, इनकम टैक्स में ये छूट वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए मिलेगा. पिछले साल वित्तीय वर्ष 2018-19 में 2.5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री थी जबकि 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की इनकम (income) पर 5 फीसदी टैक्स देना होता था.

50,000 रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन

नए वित्त वर्ष में टैक्स पेयर ज्यादा टैक्स बचा पाएंगे, क्योंकि अंतरिम बजट 2019 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया है. इस तरह इसमें 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है. स्टैंडर्ड डिडक्शन टैक्स की राशि में दी जाने वाली वाली छूट होती है इसके लिए खर्च किए जाने वाले अमाउंट का बिल जमा करना होता है.

TDS बढ़कर हुई 40 हजार रुपये

ब्याज से होने वाली आमदनी के स्रोत पर कर की कटौती (टीडीएस) की सीमा सालाना 10 हजार रुपये से बढ़कर 40 हजार रुपये हो गई है. इससे सीनियर सिटीजन और छोटे जमाकर्ताओं को फायदा होगा, जो बैंकों एवं डाकघरों में पैसे जमा करते हैं उसपर ब्याज प्राप्त करते हैं. अब तक इन्हें 10 हजार रुपये सालाना तक की ब्याज आय पर टैक्स में छूट थी जिससे बढ़ाकर 40 हजार वार्षिक कर दिया गया है.

फिजिकल शेयरों का ट्रांसफर नहीं

1 अप्रैल, 2019 से जिनके पास कंपनियों के शेयर फिजिकल फॉर्म में हैं, वे एक अप्रैल के बाद उन्हें न तो ट्रांसफर कर पाएंगे और न ही बेच पाएंगे. जून 2018 में सेबी ने रेग्युलेशंस में बदलाव किया था जो कि 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगे. अभी 3.33 लाख करोड़ या देश में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटल का 2.3% हिस्सा फिजिकल शेयरों के रूप में है. कई निवेशकों को अब फिजिकल शेयरों को डीमैट फॉर्म में बदलना पड़ेगा, तभी वे उन्हें ट्रांसफर कर पाएंगे या बेच पाएंगे.

दूसरे मकान का नोशनल रेंट टैक्स फ्री 

अंतरिम बजट 2019 में ऐसा प्रावधान किया गया कि अगर आपके पास दो घर हैं और दूसरा घर खाली है, तो उसे भी सेल्फ-ऑक्युपाइड ही माना जाएगा और आपको नोशनल रेंट (काल्पनिक किराये) पर टैक्स नहीं देना होगा. वर्तमान में अगर आपके पास एक से अधिक घर हैं तो उनमें से एक ही घर सेल्फ-ऑक्युपाइड और दूसरा घर किराये पर दिया हुआ माना जाता है (घर खाली रहने के वावजूद), जिसके नोशनल रेंट पर टैक्स देना पड़ता है.

First published: 30 March 2019, 13:09 IST
 
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