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आरबीआई के नए गवर्नर उर्जित पटेल मुद्रास्फीति के खिलाफ राजन के दाहिने हाथ हैं

नीरज ठाकुर | Updated on: 22 August 2016, 7:40 IST

किसी ऐसे व्यक्ति का चुनाव करने के बजाय जो मुद्रास्फीति को लेकर रघुराम राजन के रुख का विरोधी हो मोदी सरकार ने रघुराम राजन के उत्तराधिकारी के रूप में उनके दाहिने हाथ माने जाने वाले उर्जित पटेल का चुनाव किया है.

मोदी सरकार ने यह नियुक्ति विशेषज्ञों और उद्योगपतियों द्वारा मुद्रास्फीति के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने के लिये राजन को दोबारा पद न दिये जाने को लेकर दो महीने तक सार्वजनिक आलोचना सुनने के बाद की है.

एनडीए सरकार से जुड़े कई लोग मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के राजन के ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों की सीधे परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर आलोचना करते आए हैं.

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक खुले पत्र में सरकार का रुख सबके सामने रख दिया था.

इस पत्र में स्वामी ने कहा था कि राजन ने देश में उच्च ब्याज दरों को जारी रख भारत की आर्थिक वृद्धि को मारने का काम किया है.

राजन ने 18 जून को इस बात की घोषणा की थी कि वे भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर के रूप में दूसरे कार्यकाल के आकांक्षी नहीं हैं और दोबारा पठन-पाठन के क्षेत्र में लौटना चाहते हैं. राजन का मौजूदा कार्यकाल 4 सितंबर को समाप्त हो रहा है.

अगर आरबीआई ने थोक मूल्य सूचकांक पर ध्यान दिया होता तो देश में ब्याज करें काफी कम होतीं

लेकिन यहां पर यह जानना बेहद आवश्यक है कि वह पटेल की अगुवाई में गठित एक पैनल था जिसने आरबीआई की मौद्रिक नीति के लिये मुद्रास्फीति को चिंता के सबसे बड़े विषयों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया था.

उर्जित पटेल की अगुवाई में गठित पैनल की रिपोर्ट में दिये गए प्रस्ताव के आधार पर ही केंद्रीय बैंक ने केंद्रीय मौद्रिक नीति तैयार करने के क्रम में मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति) पर ध्यान देना प्रारंभ किया.

इससे पूर्व अर्थशास्त्री और यहां तक कि आरबीआई भी अपना पूरा ध्यान थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पर केंद्रित करते थे जो आम तौर पर खुदरा मुद्रास्फीति से कम ही रहती है.

अगर आरबीआई ने थोक मूल्य सूचकांक पर ध्यान दिया होता तो देश में ब्याज करें काफी कम होतीं. लेकिन 4 प्रतिशत से अधिक की मुद्रास्फीति, जो वर्तमान में 6.07 प्रतिशत है- ने सुनिश्चित किया कि राजन अपने तीन साल लंबे कार्यकाल के दौरान ब्याज दरों में सिर्फ 1.5 प्रतिशत की कटौती ही कर पाए.

पटेल के अतीत को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मुद्रास्फीति से निबटने के लिये विचारों के मामले में वे भी राजन वाली मानसिकता और खयाल रखते हैं.

इसीलिये पटेल की आरबीआई के गवर्नर के पद पर हुई पदोन्नति ने बाजार के साथ ही विदेशी निवेशकों को यह संदेश दिया है कि भविष्य की मौद्रिक नीति के मार्गदर्शन के समय मुद्रास्फीति एक प्रमुख बिंदु रहेगी.

पटेल ने 1990 से 1995 के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भारत, अमरीका, बहामास, म्यांमार डेस्क पर काम किया

हाल ही में अंर्तराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर सर्विस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सोवरिन रिस्क ग्रुप मेरी डिरोन ने मुद्रास्फीति को लेकर आरबीआई के कड़े रुख की प्रशंसा की थी.

डिरोन ने पीटीआई से कहा, ‘‘बीते दो वर्षों में भारतीय मुद्रास्फीति अधिक मध्यम स्तरों तक गिरी है और इसका एक बड़ा कारण एक विश्वसनीय मौद्रिक नीति रही है जिसने मुद्रास्फीति की उम्मीदों को संभाला है. हमें उम्मीद है कि आरबीआई मुद्रास्फीति के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए ऐसी ही नीतियों और संचार को जारी रखेगी.’’

मूडीज ने भारत को एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ ‘बीएएए3’ की रेटिंग दी है. साफ है कि मोदी सरकार ने निवेशक समुदाय से प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही यह चुनाव किया है. यह नियुक्ति कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा की अध्यक्षता वाली वित्तीय क्षेत्र की नियामक नियुक्ति खोज समिति (एफएसआरएएससी) की सिफारिश पर की गई है.

पटेल का चुनाव आरबीआई के पूर्व गर्वनर सुबीर गोकर्ण, भारतीय स्टेट बैंक की मौजूदा अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य, आरबीआई के दो बार के गवर्नर और वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के निदेशक राकेश मोहन के बीच से किया गया है.

येल विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी 52 वर्षीय पटेल 2013 में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के रूप में नियुक्त होने से पहले बोस्टन कंसल्टिंग समूह के साथ सलाहकार के रूप में तैनात थे.

पटेल ने 1990 से 1995 के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भारत, अमरीका, बहामास और म्यांमार डेस्क को कवर करते हुए काम किया है. वे आरबीआई के गर्वनर के पद पर नियुक्त किये जाने वाले 8वें डिप्टी गवर्नर होंगे.

First published: 22 August 2016, 7:40 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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