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वित्त मंत्री ने कहा, ऑटो सेक्टर की मंदी के लिए ओला-उबर भी जिम्मेदार

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 September 2019, 9:20 IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संकेत दिया कि सरकार ऑटोमोबाइल उद्योग की डिमांड को पूरा करने के लिए आने वाली जीएसटी कॉउंसिल की बैठक में बड़ा फैसला लिया जा सकता है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री 31.6 प्रतिशत घटकर 196,524 इकाई रह गई है. यह दसवां महीना है जब वाहनों की बिक्री में लगातार बिक्री कमी आयी है. ऑटो उद्योग 28 प्रतिशत की वर्तमान दर से जीएसटी दर में कटौती की मांग कर रहा है.

वित्त मंत्री ने कहा, "ऑटो सेक्टर जो दो साल पहले तक अच्छी स्थिति में था. उन्होंने कहा विभिन्न कारणों से बिक्री प्रभावित हो रही है, जिनमें बीएस VI उत्सर्जन मानदंड और पंजीकरण शुल्क शामिल हैं. वित्त मंत्री ने कहा गाड़ियों को लेकर युवाओं की सोच बदली है. अब वे खुद का वाहन खरीदकर मासिक किस्त देने के बजाए ओला, उबर या मेट्रो (ट्रेन) सेवाओं को पसंद करते है. वित्त मंत्री ने कहा हमारी इन सब पर नजर है और हम इसके समाधान का प्रयास करेंगे.''

 

जीएसटी दर कम करने की मांग

फिटमेंट कमेटी के अनुमान के मुताबिक ऑटो सेक्टर में जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत होने की स्थिति में सालाना लगभग 50,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा. फिटमेंट कमेटी का अनुमान है कि अकेले ऑटो पार्ट्स के लिए रेट में कटौती करने पर 22,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. ऑटो सेक्टर से कुल राजस्व सालाना लगभग 3 ट्रिलियन रुपये आंका जाता है.

SIAM द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दोपहिया वाहनों की बिक्री ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख बैरोमीटर है. पिछले वर्ष की समान अवधि में 1,947,304 इकाइयों के मुकाबले 22.24 प्रतिशत घटकर 1,514,196 इकाई रह गई.

 SIAM के आंकड़ों में खुलासा: 21 साल के सबसे बुरे दौर में वाहनों की बिक्री

First published: 11 September 2019, 8:51 IST
 
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