Home » बिज़नेस » Niti Aayog CEO Amitabh Kant said till 2020 thumb will be used to pay within seconds & ATM, Credit cards & POS machines will be useless
 

अगले 3 साल में प्लास्टिक मनी को बेकार कर देगा अंगूठा

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 January 2017, 15:16 IST

नोटबंदी के बाद कैशलेस और डिजिटल ट्रांजैक्शन पर जोर दे रही केंद्र सरकार, आधार कार्ड पर आधारित पेमेंट को भी तेजी से बढ़ाने में लगी है. ऐसे में जब लोगों का अंगूठा ही पेमेंट के लिए जरूरी हो गया है तो आने वाले वक्त में प्लास्टिक मनी यानी डेबिट-एटीएम-क्रेडिट कार्ड बीते हुए कल की बात हो जाएगा.

नीति आयोग का कहना है कि अगले तीन सालों यानी 2020 तक देश में एटीएम, डेबिट, क्रेडिट कार्डों और प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों की जरूरत खत्म हो जाएगी. आने वाले वर्षों में लोग सिर्फ अंगूठे का इस्तेमाल करके ही लेनदेन कर सकेंगे.

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत प्रवासी भारतीय दिवस 2017 के दौरान 'स्टार्ट्अप्स एंड इन्नोवेशंस विच हैव सोशल इंपैक्ट इन इंडिया' विषय पर बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और सोशल इन्नोवेशन दोनों ही क्षेत्रों में बहुत व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है.

सोशल इन्नोवेशन के जरिये देश एक लंबी छलांग लगाएगा. उनका मानना है कि 2020 तक देश में सभी डेबिट कार्ड्स, क्रेडिट कार्ड्स, एटीएम मशीनें और पीओएस मशीनें पूरी तरह अप्रांसगिक हो जाएंगी.

अमिताभ कांत ने आगे कहा, "देश में इन सभी चीजों की आवश्यकता नहीं रह जाएगी. देश इस क्षेत्र में काफी लंबी छलांग लगाएगा और हर देशवासी केवल 30 सेकेंड के भीतर ही अपने अंगूठे का इस्तेमाल करके कैशलेस ट्रांजैक्शन कर रहा होगा. फिलहाल हम डिजिटल पेमेंट को व्यापकरूप से आगे बढ़ा रहे हैं और इसकी वजह से इन्नोवेशन के तरीकों में काफी बदलाव संभव हो सकेगा."

हम इस समय देश में डिजिटल तरीकों से भुगतान को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं और इसमें कई नए तरीकों के सामने आने से काफी उठापटक चल रही है. इस उठापटक के बीच भारत ने बायोमेट्रिक में काफी प्रगति की है, जिससे काफी सफलता मिलेगी. उन्होंने हाल में जारी भीम ऐप और आधार के जरिये होने वाली भुगतान प्रणाली का भी जिक्र करते हुए कहा कि भारत व्यापक तौर पर नकदी से चलने वाली अर्थव्यवस्था रही है लेकिन अब यहां एक अरब के करीब मोबाइल ग्राहक हैं और इतने ही बायोमेट्रिक भी हैं.

भारत को अनौपचारिक से औपचारिक अर्थव्यवस्था बनने की जरूरत है. अब तक यहां केवल दो से ढाई प्रतिशत लोग ही टैक्‍स का भुगतान करते रहे हैं.

First published: 8 January 2017, 15:16 IST
 
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