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बजट 2018 : नौकरी नहीं है, आपको कारोबारी बनाना चाहती है मोदी सरकार !

सुनील रावत | Updated on: 1 February 2018, 17:23 IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने बजट में वेतनभोगी वर्ग को उत्साहित करने में ज्यादा असफल नहीं रहे. हालांकि उन्होने भारतीयों को अपनी नौकरी छोड़ने और आंत्रपेन्योर बनने लिए पर्याप्त प्रावधान बजट में किए हैं. बीते तीन साल में मोदी सरकार नौकरी के मोर्चे पर पूरी तरह असफल हुई है. बीते दिनों एक टीवी चैनल पर पीएम मोदी की उस बात पर भी खूब हंगामा मचा था जब उन्होंने पकौड़े बेचने को रोजगार माना था. 

मोदी सरकार ने आम बजट में उन लोगों को बड़ी राहत दी है जो लघु उद्यम (एमएसएमई) शुरू करना चाहते हैं. सरकार ने बजट में 250 करोड़ के टर्नओवर करने वाली कंपनियों पर कॉर्पोरेट टैक्स 29 से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है. जो कोई भी छोटे व्यवसाय खोलना चाहता है, उसके लिए ऑनलाइन क्रेडिट भी आसान हो सकता है. 

 

सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने पूरे देश में लगभग 40 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों को 1.5 ट्रिलियन (1.5 लाख करोड़ रुपये) की मंजूरी दे दी. प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही के एक साक्षात्कार में इस बात पर बल दिया कि सरकार ई-मार्केट (जीईएम) के जरिये छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों के उद्यमियों का सामान खरीदेगी.

इनमें से बड़ी संख्या वो महिलाएं काम कर रही हैं जिनके लिए मुद्रा ऋण योजना के तहत बैंक क्रेडिट बढ़ाया गया है.

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन चीजों को केंद्रीय सरकार के विभागों और राज्य सरकारों को आपूर्ति करने के लिए कितनी बड़ी कंपनियों को ठेके मिल रहे हैं, और अब सरकार सीधे लोगों से इसे खरीद सकती है.

जेटली ने यह भी जोर देकर कहा कि सरकार जल्द ही एमएसएमई क्षेत्र की गैर-निष्पादित संपत्ति की समस्या से निपटने में सफल होगी. इसका मतलब यह है कि भले ही कोई व्यक्ति अपने छोटे व्यवसाय में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत करते हुए विफल हो जाता है तो सरकार उसकी सहायता करेगी.

First published: 1 February 2018, 17:20 IST
 
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