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विलय से बैंकों में किसी की नौकरी नहीं जाएगी, वित्त मंत्री ने संसद में दिया आश्वासन

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 January 2019, 16:26 IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय से नौकरियों का कोई नुकसान नहीं होगा. इस सप्ताह की शुरुआत में मंत्रिमंडल ने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ विजया बैंक और देना बैंक के विलय को मंजूरी दी थी. जेटली ने कहा कि बैंकों के विलय से किसी को नौकरी का नुकसान नहीं होगा और इस कदम से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) जैसी बड़ी इकाई का निर्माण होगा. उन्होंने कहा कि इससे कर्ज देने की लागत भी सस्ती हो सकती है.

प्रश्नकाल के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों में से 11 पीएसी (शीघ्र सुधारात्मक कार्रवाई) ढांचे के तहत हैं. पीएसी उन बैंकों के खिलाफ शुरू किया जाता है जिनके पास गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का उच्च स्तर होता है.

एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए जेटली ने कहा कि गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की वक्र कम हो जाएगी. उन्होंने कहा इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड ने सिस्टम में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये वापस लाने में मदद की है.

जेटली ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक परिचालन लाभ कमा रहे हैं. उन्होंने कहा कि गैर निष्पादित आस्तियों के लिए प्रावधान के कारण उन्हें नुकसान हुआ है.
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के पुनर्पूंजीकरण के संबंध में मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में 31 दिसंबर तक 51,533 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है.

उन्होंने कहा ''वित्त वर्ष 2018-19 के बजट अनुमानों में पीएसबी के पुनर्पूंजीकरण के लिए 65,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और 31 दिसंबर, 2018 तक पीएसबी में 51,533 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है," मंत्री ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में केंद्रीय बजट में 90,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान सरकार द्वारा विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों में इसका इस्तेमाल किया गया था.

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First published: 4 January 2019, 16:09 IST
 
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