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दुनिया के सबसे बड़े सॉवरिन वेल्थ फंड ने रोका निवेश, मुश्किल में Reliance और ONGC

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 March 2019, 17:14 IST

दुनिया की सबसे बड़ी संप्रभु धन निधि का दुनिया भर में तेल और गैस खोजकर्ताओं में निवेश रोकने के का निर्णय भारतीय कंपनियों पर बुरा असर डाल सकता है. इस फैसले से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL), तेल और प्राकृतिक गैस कार्पोरेशन लिमिटेड (ONGC), Indian Oil Corp. Ltd (IOC) जैसी कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं.  नॉर्वे के सरकारी पेंशन फंड ग्लोबल (GPFG) का निर्णय वैश्विक तेल बाजारों में अनिश्चितता के खिलाफ माना जाता है और जलवायु परिवर्तन की चिंताओं ने कई देशों को अक्षय ऊर्जा पर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया है.

GPFG ने पहले कोयला परियोजनाओं में निवेश करना बंद कर दिया था, उसने भारतीय इक्विटी में अब तक कुल 7.39 बिलियन डॉलर का 253 निवेश किया है. इसमें से RIL ($ 485.19 मिलियन), ONGC ($ 108.74 मिलियन), इंडियन ऑयल ($ 61.6 मिलियन) और ऑयल इंडिया ($ 2.03 मिलियन) में कुल 658 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल है.

 

फंड में 9,158 कंपनियों के शेयरों का स्वामित्व है, जो दुनिया की सूचीबद्ध इक्विटी का 1.4 प्रतिशत है.  परमाणु हथियार या बारूदी सुरंगों का उत्पादन करने वाली कंपनियों में निवेश करने या अन्य मानदंडों के साथ मानव अधिकारों के उल्लंघन में शामिल होने से कानून द्वारा निषिद्ध है. कुछ 71 कंपनियों को वर्तमान में विभिन्न आधारों पर काउंसिल ऑन एथिक्स की सिफारिशों पर बाहर रखा गया है. अन्य 69 कंपनियों को सीधे केंद्रीय बैंक द्वारा थर्मल कोयले पर निर्भरता के आधार पर बाहर रखा गया है.

नार्वे की सरकार ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "सरकार नार्वे की अर्थव्यवस्था में कुल तेल की कीमत के जोखिम को कम करने के लिए सरकारी पेंशन फंड ग्लोबल से ऊर्जा क्षेत्र के भीतर अन्वेषण और उत्पादन (ईएंडपी) कंपनियों के रूप में वर्गीकृत कंपनियों को बाहर करने का प्रस्ताव कर रही है."

पेट्रोलियम निर्यातक देशों (ओपेक) और रूस द्वारा आपूर्ति में कटौती के लिए उठाये गए कदम ने अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया गया है. इसके अलावा अमेरिका ने सरकारी तेल कंपनी पेट्र लेओस डी वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बहुपक्षीय और द्विपक्षीय एजेंसियों के साथ-साथ संप्रभु धन कोष उन व्यवसायों में निवेश को रोक रहे हैं जो जलवायु परिवर्तन में योगदान करते हैं.

First published: 13 March 2019, 17:13 IST
 
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