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अब प्रधानमंत्री 'मुद्रा योजना' में पकड़ा गया बड़ा फर्जीवाड़ा, गलत तरीके से दी गयी लोन की मंजूरी

सुनील रावत | Updated on: 25 February 2018, 13:23 IST

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रीफिनेंस एजेंसी (मुद्रा) योजना के तहत जारी एक लोन फर्जीवाड़े में नया मामला दर्ज किया है. इस मामले में राजस्थान के बाड़मेर में पीएनबी की शाखा में एक वरिष्ठ शाखा प्रबंधक ने सितंबर 2016 और मार्च 2017 के बीच गलत तरीके से 26 मुद्रा लोन का वितरण किया. जिसके कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को 62 लाख रुपये का नुकसान हुआ है.

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नीरव मोदी के मामले के बाद अब सीबीआई ने बैंकिंग क्षेत्र में अपनी सतर्कता बढ़ा दी है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार ताजा मामले में पीएनबी ने मुद्रा लोन को बिना पूर्व-निरीक्षण या भौतिक सत्यापन के मंजूरी दे दी.

बता दें कि एनडीए सरकार ने स्वरोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से छोटे उद्यमों के लिए 10 लाख रूपए तक के असुरक्षित ऋण देने की मुद्रा योजना शुरू की थी. मुद्रा के तहत व्याज दर अन्य कर्जों से अपेक्षाकृत कम है. साथ ही ऋण सुविधा प्राप्त करने के समय बैंकों को संपार्श्विक जमा करने की आवश्यकता नहीं है.

हालांकि लोन की मंजूरी या वितरण के बाद उधारकर्ता को धन का उपयोग करते हुए एक संपत्ति बनाने की आवश्यकता होती है जो स्वीकृत लोन के लिए सिक्योरिटी का काम करता है. ताजा मामले में मुद्रा लोन के तहत मंजूर किए गए ऋणों से कोई संपत्ति नहीं बनाई गई थी. सीबीआई का कहना है कि इस मामले में पीएनबी की तरफ से बड़ी चूक हुई है.

इस लोन के मामले में पीएनबी बाड़मेर के तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक इंदर चंद चुंडवा ने व्यवसाय की जगह का लोन से पहले निरीक्षण और भौतिक सत्यापन नहीं किया. फील्ड सत्यापन केवल 26 ऋण मामलों में से एक में किया गया था जो फर्जी और कार्यालय में एक मेज पर तैयार प्रतीत होता है.

सीबीआई ने पाया कि कुछ उधारकर्ताओं को बाड़मेर से 100 किलोमीटर दूर के थे. जबकि बैंक केवल शाखा के 25 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को ऋण स्वीकृत कर सकता है.

26 लोन खातों में से पांच एनपीए में बदले गए हैं क्योंकि संपत्ति का निर्माण करने के लिए ऋण का उपयोग नहीं किया गया था. बैंक 6.2 लाख की बकाया राशि वसूल नहीं कर सकता क्योंकि बैंक के पास कोई सिक्युरिटी राशि उपलब्ध नहीं है.

इस प्रकार सरकारी कर्मचारी ने बैंक को 62 लाख का नुकसान पहुंचाया. सीबीआई ने आगे पाया कि जोधपुर में पीएनबी के उप महाप्रबंधक ने इस मामले की जांच कराई थी और शाखा के अनुभाग अधिकारी को भी निलंबित कर दिया गया था लेकिन बाद में उन्हें रद्द कर दिया गया था और वर्तमान में उन्हें राजस्थान में पीएनबी अबू रोड शाखा में तैनात किया गया है.

First published: 25 February 2018, 13:20 IST
 
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