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क्या देश में बढ़ रही है गरीबी? NSO का खुलासा - गांवों की खर्च करने की क्षमता में आयी गिरावट

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 November 2019, 10:48 IST

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के नवीनतम उपभोग व्यय सर्वेक्षण के अनुसार 2017-18 में चार दशकों में पहली बार उपभोक्ता खर्च में सबसे ज्यादा कमी आयी है. इसका मुख्य कारण ग्रामीण मांग में कमी माना जा रहा है. भारत में घरेलू उपभोक्ता व्यय एक महीने में किसी व्यक्ति द्वारा खर्च की गई औसत राशि 2017-18 में 3.7 प्रतिशत घटकर 1,446 रुपये हो गई जो 2011-12 में 1,501 रुपये थी.

रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति मासिक खपत व्यय (एमपीसीई) के आंकड़े वास्तविक संदर्भ में हैं यानी इन्हें 2009-10 को आधार वर्ष मानकर मुद्रास्फीति के लिए समायोजित किया गया है. बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 उपभोक्ता खर्च गांवों में 8.8 फीसदी घट गई जबकि शहरों में यह छह साल की अवधि में यह 2 फीसदी बढ़ी है. जानकारों का कहना है कि देश में उपभोक्ता खर्च में कमी का कारण यह है कि देश में गरीबी बढ़ी है. साथ ही यह इस बात का संकेत माना जा रहा है कि गांवों में उपभोक्ता मांग में भारी कमी आयी है.

रिपोर्ट के अनुसार एनएसओ ने जुलाई 2017 और जून 2018 के बीच इस सर्वे को किया था. यह भी खुलासा किया गया था कि समिति ने 19 जून को इसे जारी करने की हरी झंडी दे दी थी लेकिन इसे रोक दिया गया था. इस सर्वे के दौरान देश में जीएसटी भी लागू किया गया था. साथ ही इसके कुछ महीने बाद नोटबंदी की घोषणा की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार योजना आयोग के पूर्व सदस्य अभिजित सेन का कहना है कि ''लोगों के कल्याण के लिहाज से यह वास्तव में चिंताजनक है.

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खासकर ग्रामीण में खानेपीने की चीजों पर खर्च में कमी यह दिखाती है कि कुपोषण बढ़ा है. यह कहना उचित होगा कि गरीबी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई होगी.'' उन्होंने कहा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने दूध और उससे जुड़े उत्पादों को छोड़कर सभी खाद्य पदार्थों पर लोगों ने कम खर्च किया है. साथ ही देश में तेल, नमक, चीनी और मसाले जैसी खाद्य सामग्री पर खर्च में भारी कटौती हुई है.

 

First published: 15 November 2019, 10:12 IST
 
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