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नौकरियों बड़ी गिरावट बताने वाली NSSO की रिपोर्ट रद्दी की टोकरी में डालेगा नीति आयोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 February 2019, 10:48 IST

 

एनडीए सरकार ने बेरोजगारी पर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में डालने की योजना बना ली है. इसके बजाय माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (मुद्रा) योजना के तहत बनाई गई नौकरियों पर श्रम ब्यूरो के सर्वेक्षण के निष्कर्षों का उपयोग करने कोकहा गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नीति आयोग ने गुरुवार को श्रम मंत्रालय को सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू करने और 27 फरवरी को अपने निष्कर्ष पेश करने को कहा ताकि इसे मार्च के पहले सप्ताह तक साझा किया जा सके.

बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार और उनके अधिकारियों ने भाग लिया. ब्यूरो के सर्वेक्षण में 1 लाख मुद्रा लाभार्थी शामिल हैं, जिन्होंने अप्रैल 2015 से 31 जनवरी, 2019 के बीच ऋण योजना का लाभ उठाया. NITI ने मंत्रालय से इस योजना के माध्यम से सीधे रोजगार प्राप्त लोगों की संख्या के आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा है.

 

NITI चाहती है कि आधिकारिक निष्कर्षों के अनुसार नमूना निष्कर्षों को 15.56 करोड़ से अधिक मुद्रा लाभार्थियों तक पहुंचाया जाए. श्रम मंत्रालय ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो अन्य नौकरियों से स्वरोजगार में चले गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप नए रोजगार सृजन की स्थिति है. Niti Aayog को उम्मीद है कि ब्यूरो की रिपोर्ट में अन्य दो सर्वेक्षणों पर काउंटर रिपोर्ट की मदद की जाएगी जो आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई हैं. जो कि NDA सरकार के कार्यकाल में नौकरियों में नुकसान को दर्शाती है.

श्रम ब्यूरो के 6वें वार्षिक रोजगार-बेरोजगारी सर्वेक्षण ने 2016-17 में बेरोजगारी को 3.9 प्रतिशत के चार साल के उच्च स्तर पर दिखाया था, जबकि एनएसएसओ के सर्वेक्षण की एक रिपोर्ट में बेरोजगारीदर 2017-18 में 45 साल की उच्चतर स्तर पर थी. इससे पहले अपनी सरकार द्वारा नौकरी के सृजन में कमी को लेकर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महीने की शुरुआत में संसद को बताया कि वर्तमान में नौकरी डेटा एकत्र करने की कोई सही प्रणाली नहीं थी.

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First published: 22 February 2019, 10:48 IST
 
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