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अब ATM मशीनों के लिए तरस सकते हैं आप, RBI के आंकड़ों ने दिए डराने वाले संकेत

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 May 2019, 11:14 IST

भारत में जहां नकदी पर निर्भरता बनी हुई है, वहीं एटीएम मशीनों को ढूंढ़ना मुश्किल होता जा रहा है. एक रिपोर्ट की माने तो सख्त नियमों के कारण मशीनों को चलाना ज्यादा महंगा पड़ रहा है. शनिवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश में स्वचालित टेलर मशीनों की संख्या लेनदेन में वृद्धि के बावजूद पिछले दो वर्षों में है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार ब्रिक्स देशों में भारत आईएस देश है जहां प्रति 100,000 लोगों पर कुछ ही एटीएम हैं. यह गिरावट जारी रह सकती है क्योंकि पिछले साल केंद्रीय बैंक द्वारा अनिवार्य किए गए सॉफ्टवेयर और उपकरणों के अपग्रेडेशन की लागत को सिक्योर करने के लिए बैंक और एटीएम ऑपरेटर संघर्ष कर रहे हैं.

पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी लागू किये जाने के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने की बात कही गई लेकिन नोटबंदी के तीन साल बाद भी नगदी का सर्कुलेशन पहले से ज्यादा बढ़ चुका है. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार देश में एटीएम मशीनों के प्रदाता हिताची पेमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रुस्तम ईरानी ने कहा, "एटीएम की घटती संख्या आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करेगी, विशेष रूप से जो पिरामिड के निचले हिस्से में सामाजिक-आर्थिक हैं."

 

जैसे-जैसे सुरक्षा लागत बढ़ती जा रही है, एटीएम ऑपरेटरों को घाटा उठाना पड़ रहा है. क्योंकि राजस्व के लिए वे जिस शुल्क पर भरोसा करते हैं वह कम रहता है और उद्योग समिति की मंजूरी के बिना यह नहीं बढ़ सकता. ययाही कारण है कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में भारत में एटीएम मशीनों की संख्या में गिरावट आई है. “एटीएम की इस धीमी गति के पीछे इंटरचेंज फीस सबसे बड़ा कारक है. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर. गांधी ने कहा, "उन्हें जमीनी हकीकत का ध्यान रखना होगा.

बैंक अपने स्वयं के एटीएम को संचालित करने के बजाय अन्य बैंकों को इंटरचेंज शुल्क का भुगतान करना सस्ता पा रहे हैं." फिर भी हर कोई इस बात से सहमत नहीं है कि बढ़ती फीस इसका समाधान है. 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद से मोदी ने 355 मिलियन लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के बाद एटीएम सहित बुनियादी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है. कई भारतीयों ने खाते तब खोले जब प्रधान मंत्री ने नवंबर 2016 में 86% बैंक नोटों को अवैध बना दिया.

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First published: 15 May 2019, 11:10 IST
 
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