Home » बिज़नेस » Oil companies will have bear a loss of up to 1 rupee per liter on sale of diesel and gasoline
 

पेट्रोल-डीजल पर एक रूपये प्रति लीटर घाटा खाने को क्यों तैयार है मोदी सरकार ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 April 2018, 17:29 IST

इंटरनटोनल बाजार में तेल की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी है ऐसे में केंद्र में सरकारी तेल कंपनियों को खुदरा डीजल और गैसोलीन की कीमतों में एक रूपये प्रति लीटर घाटा सहने के लिए कहा है. अब इंडियन ऑयल कार्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प सहित कंपनियों को डीजल और गैसोलीन की बिक्री के लिए एक रूपये प्रति लीटर का भुगतान करना होगा.

इंडियन ऑयल के शेयरों में मुंबई में 7.6 फीसदी की गिरावट आई है, जो नवंबर 2016 से इंट्राडे ट्रेडिंग में सबसे ज्यादा थी, जबकि एचपीसीएल की हिस्सेदारी में 8.3 फीसदी की गिरावट आयी.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते है कि इस साल राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले तेल कीमतों को नियंत्रण में रखना जरूरी है. पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने एक एक इंटरव्यू में कहा है कि दक्षिण एशियाई देश, जो अपनी वार्षिक कच्चे तेल की जरूरत के मुकाबले 80 प्रतिशत से अधिक आयात करते है, अपने वित्त को बेहतर बनाने के लिए लगभग 50 डॉलर प्रति बैरल की कीमत देखना चाहता है.

वहीं जीएसटी के लागू होने के बाद सुस्त राजस्व संग्रह की वजह से तेल की कीमतों पर उत्पाद शुल्क में कटौती की संभावना नहीं है. तेल की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी के मामले में तेल मंत्रालय को विभिन्न मूल्य बिंदुओं पर सब्सिडी भुगतान तैयार करने के लिए कहा गया है.

एचपीसीएल के चेयरमैन एम के सुराना ने नई दिल्ली में इंटरनेशनल एनर्जी फोरम के मौके पर कहा, एचपीसीएल को सरकार से किसी भी निर्देश की जानकारी नहीं है. बता दें कि मोदी सरकार ने 2014 से एक लगातार इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कम कीमतों का खूब लाभ उठाया है.

First published: 11 April 2018, 17:29 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी