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तेल का खेल : पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने में मुश्किल क्या है ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 May 2018, 14:31 IST

पेेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं. अब यह चर्चा होने लगी है कि सरकार को पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करनी चाहिए और इसे जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए. भारत की इंडस्ट्री बॉडी एसोचैम और फिक्की का कहना है कि सरकार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करना चाहिए और इसके दीर्घकालिक समाधान के लिए ऑटोमोबाइल ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करना चाहिए.

इन दोनों उद्योग बॉडी का कहना है कि कमजोर हो रहे रूपये से देश के आयात बिल में वृद्धि होगी और यह मुद्रास्फीति पर असर डालेगा. एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि पट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती एक अस्थायी राहत प्रदान कर सकती है, जबकि इसके स्थाई समाधान के लिए इन्हे जीएसटी के दायरे में लाना आवश्यक है.

 

आखिरी बार केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क अक्टूबर 2017 में घटाया था. हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहले कहा था कि केंद्र जीएसटी के तहत पेट्रोलियम उत्पादों को लाने के पक्ष में है. समस्या यह है कि पेट्रोल-डीजल पर राज्य-अलग बिक्री कर लेते है. उदाहरण के लिए महाराष्ट्र पेट्रोल पर 40 फीसदी चार्ज करता है जबकि अंडमान और निकोबार में सिर्फ 6 फीसदी चार्ज लेता है. डीजल पर प्रभावी बिक्री कर 6 प्रतिशत से 29 प्रतिशत तक है.

इसका मतलब यह है कि हर बार कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि होने से राज्यों को अधिक राजस्व मिलता है. वर्तमान में केंद्र सरकार पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 19.48 रुपये और डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर लेती है. विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोलियम को जीएसटी में शामिल किया गया तो रेवेन्यू नैचरल रेट (आरएनआर) 100 प्रतिशत अधिक हो सकता है.

यह उन राज्यों को स्वीकार्य नहीं होगा जो दूसरों की तुलना में कम लेवी चार्ज करते हैं. यह बेहद मुश्किल है कि राज्य अपने टैक्स को छोड़ने के लिए सहमत हो सकते हैं क्योंकि वे खुद जीएसटी लागू होने के बाद से राजस्व घाटे से जूझ रहे हैं. केंद्र के हिस्से से भी उत्पाद शुल्क में कटौती संभव नहीं लगती है क्योंकि इससे उसके संग्रह को नुकसान पहुंचाएगा और राजकोषीय घाटे को 3.2 प्रतिशत पर बनाए रखने की अपनी योजना में वह मुश्किल में पड़ जायेगा. सोमवार को ब्रेंट क्रूड आयल की कीमतें 78.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ यह निश्चित है कि सब्जियों और आवश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ेंगे.

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First published: 22 May 2018, 14:27 IST
 
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