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ट्रम्प की धमकी से कच्चे तेल की कीमत में जबरदस्त उछाल, भारत में कर्नाटक ने रोके दाम

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 May 2018, 12:21 IST

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के फिर से लागू करने की चर्चा के चलते कच्चे तेल की कीमतें नवंबर 2014 के बाद पहली बार 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गई हैं, जबकि ब्रेंट क्रूड के दाम 75 डॉलर प्रति बैरल बने हुए हैं. न्यूयॉर्क और लंदन में फ्यूचर्स में 1.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी दी है कि वह 12 मई तक ईरान के साथ समझौते से बाहर निकल जाएंगे, जिससे तेल  की कीमतों में और भी तेजी आ सकती है.

दूसरी ओर प्रमुख तेल निर्यातक वेनेजुएला में आर्थिक संकट के चलते उसके उत्पादन और निर्यात में बड़ी कमी आ सकती है. विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला और उसके तेल उद्योग के आर्थिक पतन के साथ-साथ ट्रम्प प्रशासन से ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए जाने की संभावनाओं से कीमतें और बढ़ने की आशंका है.

वेनेज़ुएला का तेल उत्पादन 2000 के बाद से 1.5 मिलियन बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कम हो गया है, क्योंकि ये देश अपने पेट्रोलियम उद्योग को बनाए रखने के लिए पर्याप्त निवेश करने में विफल रहा है.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 12 मई को होने वाले हैं, ऐसे में सरकार ने 23 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को रोक दिया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में शनिवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल थी. पिछले 14 दिनों से दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 74.63 रुपये प्रति लीटर और डीजल 65.93 रुपये प्रति लीटर है.

कच्चे तेल की कीमतों में हर 1 डॉलर की वृद्धि के से चालू खाता घाटे पर लगभग 1 अरब डॉलर का असर पड़ता है. केंद्र सरकार वर्तमान में पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर का उत्पाद शुल्क लेती है.

अक्टूबर में सरकार ने उत्पाद शुल्क में 2 रुपये के कटौती की थी, जिसके बाद माना गया कि इससे सालाना आधार पर सरकार को 130 अरब रुपये से ज्यादा का राजस्व नुकसान हुआ. नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के बीच 13 महीने की अवधि में केंद्र ने नौ बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया. इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर केंद्र ने राज्यों से पेट्रोल और डीजल पर वैट को कम करने के लिए कहा है. हालांकि इसका पालन खुद बीजेपी शसित राज्यों ने ही नहीं किया.

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First published: 7 May 2018, 12:03 IST
 
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