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अच्छे दिन जाने वाले हैं..कच्चे तेल की कीमतों में 109 रुपये का उछाल, डीजल-पेट्रोल के भाव में हो सकती है भारी वृद्धि

दीपक कुमार सिंह | Updated on: 4 December 2018, 23:58 IST

मंगलवार को यानि 04 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में करीब 02 प्रतिशत उछाल दर्ज किया गया. कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में करीब 109.31 रुपये (भारतीय करेंसी) प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई है. कच्चे तेल की वृद्धि का सीधा असर डीजल-पेट्रोल के मूल्य पर पड़ेगा. फ़िलहाल देश में डीजल-पेट्रोल के भाव में जारी गिरावट पर ब्रेक लग सकता है और फिर से तेल की कीमतों में वृद्धि का दौर शुरू होने की संभावना है.

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कीमतों में गिरावट के बाद अब उच्तम स्तर पर तेल के भाव

क्रूड ऑयल में 1.55 यूएस डॉलर (GMT 09 55) यानि करीब 109.31 रुपये प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई और यह 63.24 डॉलर के उच्चतम स्तर पर (गिरावट शुरू होने के बाद) पहुंच गया. जबकि खबर लिखे जाने तक; भारतीय समय अनुसार शाम 6:20 बजे क्रूड ऑयल (ब्रेंट) में 2.07 % की वृद्धि देखी जा रही है और यह $ 1.28 बढ़कर 62.97 डॉलर प्रति बैरल है मतलब 90.20 रूपये कच्चे तेल के भाव बढे हैं.

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बढ़ सकती है मोदी सरकार की मुश्किलें

कुछ दिनों पहले पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने जनता के साथ-साथ सरकार को भी खूब छकाया था. थोड़े दिनों की राहत के बाद तेल फिर से आम लोगों के जेब पर डाका डालने के लिए तैयार नजर आता है. अभी पांच राज्यों में चुनाव का दौर चल रहा है और लोक सभा चुनाव में भी गिने-चुने दिन बचे हैं. कुछ दिनों पहले ही पेट्रोल ने कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ते हुए 90 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर लिया था.

इस चुनावी मौसम में अगर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो महंगाई की मार देश की जनता को परेशान करेगी. क्योंकि डीजल की कीमतें बढ़ने से सामान ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और रोजमर्रा के जरुरत की वस्तुएं महंगी हो जाएगी जबकि पेट्रोल सीधा जेब हल्का कर देगा. तब महंगाई से जूझ रही जनता अपने वोट से सरकार को जबाब देगी और निश्चित तौर पर मोदी के लिए मुश्किलें पैदा होंगी.

इसलिए आ रही तेल की कीमतों में उछाल

क्रूड ऑयल के मूल्य में वृद्धि की वजह उत्पादक देशों के समूह ओपेक द्वारा तेल के प्रोडक्शन में कटौती और कनाडा के सप्लाई में अनिवार्य कमी बताई जा रही है. गौरतलब है कि ओपेक सदस्यों तथा गैर- सदस्यों के बीच उत्पादन कटौती का करार इस साल समाप्त हो रहा है. हालांकि, यह घोषणा नहीं की गई है कि उत्पादन में कितनी कटौती की जाएगी, लेकिन कच्चे तेल के कारोबारी देशों ने इसका स्वागत किया है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

इससे पहले G 20 सम्मेलन में चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर ख़त्म करने को लेकर बातचीत पर बानी सहमति के कारण दोनों कच्चे बेंचमार्क पिछले सत्र के करीब 4% चढ़ गए थे. बीएनपी परिबास कमोडिटीज रणनीतिकार हैरी टचिलिंगुइरियन ने रॉयटर्स ग्लोबल ऑइल फोरम को बताया, "जी 20 के विकास के बाद बाजार सकारात्मक रूप से उन्मुख है और ओपेक बैठक में आगे बढ़ रहा है." "रूस द्वारा सऊदी अरब के साथ सहयोग करने और अगली ओपेक बैठक में एक समझौते को हासिल करने के लिए प्रतिबद्धता ने निश्चित रूप से कीमतों पर असर डाला है."

First published: 4 December 2018, 19:13 IST
 
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