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क्या चुनाव ख़त्म होने का इंतज़ार कर रही हैं तेल की कीमतें ?

सुनील रावत | Updated on: 26 April 2019, 15:02 IST

अक्टूबर के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बढ़ने और रूस की सप्लाई में कमी के बाद इंटरनेशनल बाजार में तेल की कीमतों के और बढ़ने की संभावना है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह किसी भी देश को वैश्विक बाजार में अपने तेल की बिक्री की जगह नहीं लेने देगा.

CLSA के मैनेजिंग डायरेक्टर और इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट का कहना है कि आने वाले दिनों में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है. तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर रुपए पर भी पड़ा है, जो अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) के मुकाबले शुक्रवार को छह सप्ताह के निचले स्तर 70.25 पर पहुंच गया.

ईरान से भारत के तेल आयात में अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद गिरावट देखी गई है, लेकिन यह अभी भी देश के तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा है. भारत ने ईरान से 2018-19 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में लगभग 24 मिलियन टन कच्चे तेल का आयात किया और मध्य पूर्वी देश से कच्चे तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है.

इन देशों से कर सकता है भारत आयात

अब भारत अब अपनी तेल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सऊदी अरब, कुवैत, यूएई और मैक्सिको जैसे अन्य देशों को देखने के लिए मजबूर होगा. नई दिल्ली ने ईरान को तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में विकसित किया है क्योंकि यह 60-दिवसीय क्रेडिट अवधि, मुफ्त बीमा और शिपिंग प्रदान करता है, जिससे घरेलू तेल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को ईंधन की कीमतों को बनाए रखने की अनुमति मिलती है.

रुपये में आएगी बड़ी गिरावट

जानकारों की माने तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से अमेरिकी डॉलर की मांग में भी वृद्धि होगी. इस प्रकार रुपये-डॉलर के विनिमय पर भारतीय मुद्रा को नुकसान पहुंचेगा. यह भारत के घरेलू इक्विटी बाजार पर भारी पड़ सकता है. यदि वैश्विक तेल की कीमतों में एक डॉलर की वृद्धि देखी जाती है, तो इससे भारत का आयात बिल 10,500 करोड़ से अधिक हो जाता है.

भारत में क्यों हैं स्थिर तेल की कीमतें

यहां तक कि प्रति बैरल 4-5 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के तेल आयात बिल में काफी वृद्धि हो सकती है और देश के चालू खाते के घाटे (सीएडी) पर असर पड़ सकता है. हालांकि भारत में चुनावों के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें 10 मार्च, 2019 से पहले चरण के ठीक एक महीने बाद सिर्फ 40-55 पैसे बढ़ी हैं.

 

First published: 26 April 2019, 14:58 IST
 
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