Home » बिज़नेस » One year of GST : Why is one year's GST learning to walk now?
 

एक साल का GST अभी चलना सीख रहा है, ..लेकिन सफर अभी लंबा है

सुनील रावत | Updated on: 1 July 2018, 15:57 IST

17 साल की बहस के बाद एक जुलाई को एक साल पहले आज ही के दिन गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) पूरे भारत में प्रभावी हुआ था. इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले कई टैक्स एक टैक्स में समाहित हो गए. साल 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक जीएसटी मॉडल डिजाइन करने के लिए तत्कालीन वित्त मंत्री (पश्चिम बंगाल) असिम दासगुप्त की अध्यक्षता में एक समिति की स्थापना की.

इस बड़े सुधार के बारे में सर्वसम्मति बनाने के लिए केंद्र सरकार और राज्यों के बीच कई वर्षों के परामर्श और बहस हुई. जीएसटी को लागू करनी की लिए बड़े स्तर पर विरोध हुआ. खासतौर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान जब नरेंद्र मोदी की अगुवाई में गुजरात सरकार ने कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर का हवाला देते हुए जीएसटी का विरोध कर डाला. विडंबना यह है कि केंद्र में यही नरेंद्र मोदी सरकार थी जिसने अगस्त 2016 में जीएसटी के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित किया.

ये भी पढ़ें : मलेसिया में क्यों फेल हुआ GST?

बिल को मंजूरी देने के लिए सरकार ने 'मनी बिल का रास्ता अपनाया, क्योंकि राज्यसभा में पार्टी के पास बहुमत नहीं था. विपक्ष ने इस कदम की आलोचना की थी और कहा कि "सरकार ने जीएसटी बिल को मनी बिल के रूप में लाकर लोगों को धोखा दिया है."हालांकि सरकार के सामने वास्तविक चुनौती इसे जुलाई 2017 को लागू करना था. जीएसटी लागू करने से पहले इंफ्रा फ्रंट पर खराब तैयारी के बारे में चिंता थी और जीएसटीएन के निर्माण में शामिल लोगों ने यह भी चेतावनी दी थी कि उनके पास एक मजबूत प्रणाली तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था. इसके बावजूद जीएसटी 1 जुलाई, 2017 को लागू हुआ.

 

जीएसटीएन ने कहा अभी और वक्त चाहिए था 

जीएसटीएन प्रमुख नविन कुमार ने लॉन्च से पहले बिजनेस स्टैंडर्ड को एक इंटरव्यू में बताया कि हम रोल-आउट से कुछ महीने पहले इसे देखना चाहते थे. क्योंकि जब आप सॉफ़्टवेयर को शुरू करने वाले होते हैं, तो कोड लिखने पर कोड को फ्रीज किया जाता है. उन्होंने कहा अगले 10 दिनों में आप इसका परीक्षण करते हैं एयर इसके लिए तीन-चार महीने लगते हैं. यही कारण रहा कि जीएसटीएन शुरुआती दिनों में परेशानी का सबब बन गया. नए टैक्स रिजीम में पहले कुछ महीनों के दौरान छोटे व्यवसाय को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. इसकी ऑनलाइन प्रक्रिया को समझना छोटे व्यवसायों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया. जबकी एक से अधिक टैक्स स्लैब ने इसे और भी जटिल बना दिया. वर्तमान में जीएसटी में 0, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के पांच टैक्स स्लैब हैं.

जीएसटी के बाद न केवल व्यवसायों, बल्कि सरकार को भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. जीएसटी परिषद को कई उत्पादों पर दरों में कई बदलाव करना पड़ा. हालंकि एक साल बाद नया टैक्स सिस्टम सुलझा हुआ प्रतीत होता है लेकिन वास्तव में व्यापक टैक्स बनने के लिए अभी भी एक लंबा सफर तय है. विश्व बैंक ने मार्च में जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में जीएसटी प्रणाली दुनिया में सबसे जटिल थी, न केवल उच्चतम टैक्स दरों को लेकर बल्कि अधिक टैक्स दरों के कारण यह और भी मुश्किल बन गया. रिपोर्ट में पेट्रोलियम उत्पादों, को जीएसटी से बाहर रखने का भी जिक्र किया गया था.

जीएसटी को लेकर कई आलोचकों ने 28 प्रतिशत के उच्चतम टैक्स स्लैब के को हटाने के लिए कहा, यहां तक कि आउटगोइंग चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यम ने हाल ही में कहा है कि जीएसटी के तहत 28 प्रतिशत टैक्स स्लैब को हटाकर और सेस की एक समान दर होने पर अप्रत्यक्ष कर संरचना को सरल बनाने का पहला कदम होना चाहिए.

First published: 1 July 2018, 15:30 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी