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मोदी सरकार में प्याज ने निकाले किसानों के आंसू, सबसे बड़ी थोक मंडी में बिक रहा 1 रुपये किलो

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 December 2018, 13:10 IST

देश के सबसे बड़े थोक बाज़ार महाराष्ट्र के लासाल गांव कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में थोक प्याज की कीमतें 1 रुपये प्रति किलो तक गिर गई हैं. पिछले कुछ महीनों में कीमतें कीमतें 91 प्रतिशत तक गिर गई. 17 अक्टूबर को कीमतें 21.51 रुपये प्रति किलोग्राम से 24 दिसंबर को लगभग 91 प्रतिशत तक गिर कर एक रूपये प्रति किलो हो गई हैं.

बाजार में गर्मियों में प्याज की आपूर्ति में अचानक वृद्धि के कारण कीमतों में गिरावट आयी. मार्च और अप्रैल में काटे जाने वाली ग्रीष्मकालीन फसल का स्टोरेज लाइफ लगभग छह महीने का होता है. आमतौर पर गर्मियों की फसल की आखिरी किश्त अक्टूबर के मध्य में बाजार में पहुंचता है, जिसके बाद खरीफ प्याज का उत्पादन होता है. लेकिन इस साल किसानों ने बाद में बेहतर कीमत की उम्मीद करते हुए ग्रीष्मकालीन फसल का स्टॉक किया था.

 

हालांकि बाजार में कम मांग ने कीमतों को कम रखा और बाजार में नए खरीफ प्याज के आगमन के साथ पिछले कुछ हफ्तों में कीमतों में गिरावट आयी. थोक प्याज की कीमत पिछले साल जुलाई में एक थी और 2016 में घटकर 5 पैसे प्रति किलोग्राम रह गई थी. कम कीमतों के साथ किसानों को अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने की लागत को वसूलना भी मुश्किल हो रहा है. अपने संकट में जोड़ने के लिए न्यूनतम तापमान में गिरावट के साथ स्टॉक किए गए प्याज अंकुरित होने लगे हैं.

पिछले महीने नासिक के एक किसान संजय साठे ने 1,064 रुपये भेजे थे, जो उन्होंने एक थोक बाजार में 750 किलोग्राम प्याज की फसल को बेचने के बाद, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को विरोध के रूप में भेजा था. किसान ने कहा था कि उसका इरादा सरकार को वित्तीय तनाव को कम करने के लिए कुछ कदम उठाने के लिए प्रेरित करना था जो कि कम कीमतों के कारण किसानों को भुगतना पड़ रहा था.

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First published: 25 December 2018, 13:11 IST
 
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