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जिस एलओयू लेटर से नीरव मोदी ने किया घोटाला, संसदीय समिति ने कहा वह सुविधा फिर हो शुरू

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 August 2018, 11:38 IST

वाणिज्य मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति ने सोमवार को राज्यसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक से गारंटी पत्र (एलओयू) की सुविधा को तत्काल बहाल करे. पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद एलओयू पर रोक लगा दी गई थी.

इस मामले में नीरव मोदी द्वारा एलओयू के गलत इस्तेमाल की बात कही गई थी. समिति ने केंद्रीय बैंक से कहा है कि वह उचित सुरक्षा उपायों के साथ एलओयू को फिर बहाल करे, जिससे कारोबारियों को ऋण की उपलब्धता बढ़ सके.

 

समिति ने यह भी नोट किया कि व्यापार और उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी हितधारकों ने सर्वसम्मति से कहा कि एलओयू और एलओसी सुविधा को बंद करने के परिणामस्वरूप क्रेडिट की लागत में 2-2.5% की वृद्धि हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कदम से देश के व्यापार और उद्योग की लागत प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी और इसका असर रोजगार पर पड़ेगा. देश नौकिरयों का नुकसान नहीं झेल सकता. संसदीय समिति ने कहा है कि रिजर्व बैंक को एलओयू-एलओसी पर रोक लगाने से पहले अंशधारकों के साथ व्यापक विचार विमर्श करना चाहिए था.

रिपोर्ट में कहा गया है, "बैंक अपने ऑपरेशन और क्रेडिट एक्सपोजर में बहुत कड़े हो गए हैं.सावधानी ने अनजाने में बैंकों को एमएसएमई क्षेत्र में पहुंच योग्य बना दिया है.

इससे पहले एलओयू पर रोक लगाते हुए आरबीआई ने एक अधिसूचना में कहा था , ‘दिशा-निर्देशों की समीक्षा के बाद आयात के लिए बैंकों द्वारा एलओयू जारी किये जाने की सुविधा पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है.’ वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक लिखित जवाब में बताया था कि (पीएनबी) की मुंबई शाखा ने मार्च 2011 से नीरव मोदी से जुड़ी विभिन्न कंपनियों को 1,213 एलओयू जारी किए थे.

शुरुआती कुछ एलओयू शाखा अधिकारियों द्वारा नीरव मोदी की कंपनियों से जुड़ी फर्मों के साथ परामर्श के बाद जारी किए गए थे और वे वास्तविक लेनदेन से संबंधित थे, वहीं पीएनबी द्वारा 53 असली एलओयू मार्च 2011 और अक्टूबर 2017 के बीच जारी किए गए.

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First published: 7 August 2018, 11:33 IST
 
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