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5000 करोड़ के बाबा: सबसे तेज़ रफ्तार कंपनी बनी पतंजलि

अभिषेक पराशर | Updated on: 27 April 2016, 7:54 IST
QUICK PILL
  • पतंजलि आयुर्वेद के कारोबार के आंकड़े बताते हैं कि बाबा रामदेव देश में स्वदेशी की मुहिम के नायक बन चुके हैं. पतंजलि आयुर्वेद के कारोबार में पिछले चार सालों के दौरान 1100 फीसदी की वृद्धि हुई है.
  • 2015 में जहां पतंजलि ने 2006 करोड़ रुपये का व्यापार किया वहीं कोलेगेट का राजस्व 3981.94 करोड़ रुपये रहा.
  • 2015-16 में पतंजलि की ग्रोथ रेट करीब 150 फीसदी रही. अगर हम इस अवधि केे दौरान कोलगेट जैसी कंपनी की वृद्धि दर को देखें तो यह 14.85 फीसदी रही है.

उत्तराखंड में सरकार गिराए जाने के मामले में कांग्रेस पर पलटवार करते हुए बाबा रामदेव ने कहा था, 'मैं चाहूं तो एक दिन में कांग्रेस को बर्बाद कर सकता हूं.'

कांग्रेस का तो पता नहीं लेकिन ऐसा लगता है कि बाबा के नेतृत्व में पतंजलि भारतीय बाजार में काम कर रही विदेशी एफएमसीजी कंपनियों कोलगेट, प्रॉक्टर एंड गैंबल, यूनिलीवर और नैस्ले के कारोबार को बर्बाद करने की मुहिम में काफी आगे बढ़ चुकी है. 

पतंजलि आयुर्वेद के कारोबार के आंकड़ों को देखकर कहा जा सकता है कि बाबा रामदेव देश में स्वदेशी की मुहिम के नायक बन चुके हैं. जिस तेजी से लोगों ने पतंजलि के उत्पादों पर भरोसा जताया है, वह देश के एफएमसीजी सेक्टर में काम करने वाली कंपनियोंं के कारोबार के लिए बड़े खतरे की आहट है.

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खराब मॉनसून और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुस्त मांग की वजह से एफएमसीजी सेक्टर की खराब हालत के बावजूद पतंजलि आयुर्वेद के कारोबार में पिछले चार सालों के दौरान 1100 फीसदी की वृद्धि हुई है. 

पतंजलि आयुर्वेद के कारोबार को लेकर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बाबा रामदेव ने कहा कि हमारा कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और हम जल्द ही तीन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को शीर्षासन करवा देंगे.

बाबा रामदेव के पातंजलि आयुर्वेद का कारोबार पिछले चार सालों के दौरान 1100 फीसदी बढ़ा है

पिछले वित्त वर्ष 2015-16 में पतंजलि का कुल राजस्व करीब 5000 करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है. वहीं पतंजलि ने मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 के लिए 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है. 

जल्द ही 'तीन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को शीर्षासन करवाने' के रामदेव के दावे को इन आंकड़ों के आधार पर सच होते हुए देखा जा सकता है. 

मुनाफा नहीं राजस्व पर जोर

आईआईएफएल की रिपोर्ट के मुताबिक, '2020 में पातंजलि का राजस्व 20,000 करोड़ रुपये छूने का अनुमान है.' रिपोर्ट में कहा गया था कि पतंजलि की तरक्की कोलगेट और डाबर की कीमत पर होगी. वहीं आईटीसी और जीसीपीएल को अपेक्षाकृत कम नुकसान होगा.

वित्त वर्ष 2020 में पतंजलि आयुर्वेद का राजस्व 20,000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है

पतंजलि आयुर्वेद का सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड घी रहा है. पिछले वित्त वर्ष 2015-16 में पतंजलि का कुल राजस्व करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक रहा और इसमें अकेले घी से 1,308 करोड़ रुपये की कमाई हुई. 

पतंजलि आयुर्वेद के लिए दूसरा बड़ा ब्रांड दंतकांति मंजन रहा जिसने पिछले वित्त वर्ष में कंपनी को 425 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिया.

पतंजलि ने मुनाफे की बजाय राजस्व पर ध्यान केंद्रित कर रखा था और कंपनी को इसका साफ फायदा मिलता दिख रहा है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2016 के लिए 5,000-6,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा था और वह इसे हासिल कर चुकी है.

2015 में जहां पतंजलि ने 2006 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया वहीं कोलेगेट का राजस्व 3981.94 करोड़ रुपये रहा. पिछले 10 सालों के दौरान कोलगेट की सालाना वृद्धि दर 14.85 फीसदी रही है जबकि 2015-16 में पतंजलि की ग्रोथ रेट करीब 150 फीसदी बढ़ गई.

2015 में जहां पतंजलि ने 2006 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया वहीं कोलेगेट का राजस्व 3981.94 करोड़ रुपये रहा

आईआईएफएल की रिपोर्ट के मुताबिक पतंजलि की बाजार हिस्सेदारी फिलहाल 5 फीसदी से अधिक है और वित्त वर्ष 2020 में यह बढ़कर 13 फीसदी होने का अनुमान है.

मांग में हो रही जबरदस्त बढ़ोतरी को पूरा करना पतंजलि आयुर्वेद के लिए सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि इसकी मदद से कंपनी के उत्पाद बाजार में विस्तार होगा. रामदेव ने कहा कि बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के  लिए कंपनी ने खुदरा वितरण प्रणाली को मजबूत करने की योजना बनाई है.

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कंपनी ने इसके लिए चार वर्टिकल तैयार किए है. होम केयर, नैचुरल कॉस्मेटिक एंड हैल्थ केयर, नैचुरल फूड और बीवरेज एंड हैल्थ ड्रिंक्स के तहत 21 उत्पादों को वितरित किया जाएगा. 

देश में पतंजलि के फिलहाल 4,000 वितरक हैं और 10,000 से ज्यादा पतंजलि के स्टोर्स हैं. देश में लगातार बढ़ रही ऑनलाइन मार्केटिंग को देखते हुए पतंजलि की योजना इस प्लेटफॉर्म पर भी विस्तार करने की है. 

पतंजलि आयुर्वेद के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने कैच से कहा, 'हम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बड़ी शुरुआत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.' अपना ई स्टोर चलाने या फिर मौजूदा ई-पोर्टल से करार किए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'हमारी योजना दोनों ही तरीके से आगे बढ़ने की है.'

एफएमसीजी लीडर बनी पतंजलि

पतंजलि की तेज रफ्तार और बाजार में मजबूत पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी ने महज चार सालों में 1100 पर्सेंट से अधिक की वृद्धि दर हासिल की है. 

2011-12 में कंपनी का राजस्व 446 करोड़ रुपये था जो 2015-16 में बढ़कर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया. 2014-15 के 2006 करोड़ रुपये के मुकाबले 2015-16 में पतंजलि के राजस्व में 150 पर्सेंट की वृद्धि दर्ज की गई.

पतंजलि ने हालांकि वित्त वर्ष 2015-16 के शुद्ध मुनाफे का जिक्र नहीं किया. तिजारावाला ने कहा, 'पिछले वित्त वर्ष में हुए मुनाफे के आंकड़े को ऑडिटिंग के बाद ही मुहैया करा पाएगी.'

ब्रांड प्रोमोशन पर न्यूनतम खर्च

एफएमसीजी की अन्य कंपनियों के मुकाबले पतंजलि को ब्रांड प्रोमोशन पर बड़ा खर्च करने की जरूरत नहीं होती. अन्य कंपनियों के दहाई अंक के मुकाबले पतंजलि का विज्ञापन खर्च कुल राजस्व का महज 1-1.5 फीसदी है. पतंजलि का पूरा विज्ञापन खर्च प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में जगह खरीदने तक ही सीमित है.

एफएमसीजी की अन्य कंपनियों के दहाई अंक के मुकाबले पतंजलि का विज्ञापन खर्च कुल राजस्व का महज 1-1.5 फीसदी है

रामदेव ने कहा, 'मैं बिना पैसों के पतंजलि का ब्रांड अंबेसडर हूं. आचार्य बालकृष्ण भी आपने काम का पैसा नहीं लेते हैं.'

अन्य कंपनियों की विज्ञापन रणनीति पर निशाना साधते हुए रामदेव ने कहा, 'हमने प्रचार का सही तरीका अपनाया है. हमने महिलाओं को उत्पाद के तौर पर पेश नहीं किया. हमारा पूरा प्रचार शिक्षा और जागरूकता पर आधारित है.'

एमएनसी से मुकाबला

एफएमसीजी सेक्टर में हाल ही में गुरमीत राम रहीम और श्री श्री रविशंकर ने अपने उत्पादों के साथ दखल दी है. इनसे मिलने वाली चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर तिजारावाला ने कहा, 'हमें इनके उत्पादों से कोई खतरा नहीं है. बल्कि इससे हमारी स्वदेशी की मुहिम को मदद ही मिलेगी.'

तिजारावाला ने कहा, 'पतंजलि की नजर देश के एफएमसीजी बाजार से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बाहर करने पर है. उन्होंने कहा कि पतंजलि की नजर देश से बाहर के बाजारों में भी दखल देने की है.'

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एफएमसीजी बाजार में प्रॉडक्ट की गुणवत्ता बेहद ही संवेदनशील मामला रहा है. गुणवत्ता की वजह से ही भारत में नेस्ले के मैगी को बाजार से कुछ महीनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया. 

पतंजलि के लिए यह बेहतर मौका था और कंपनी ने इसका फायदा उठाते हुए बाजार में आटा नूडल्स लॉन्च करने में देरी नहीं लगाई. प्रॉडक्ट में मिलावट संबंधी खबरों के बारे में पूछे जाने पर तिजारावाला ने कहा कि हमारा प्रॉडक्ट पूरी तरह से सुरक्षित है. 

उन्होंने कहा, 'पातंजलि के प्रॉडक्ट को बदनाम करने की साजिश चलती रही है. इससे हमें बहुत फर्क नहीं पड़ता. इससे निपटने के लिए हम लगातार कैंपेन चला रहे हैं ताकि लोगों को गुमराह होने से बचाया जा सके.'

उत्तराखंड से बाहर निकलेगी पतंजलि

समाजवादी पार्टी के मंत्री शिवपाल सिंह यादव हरिद्वार में बाबा रामदेव से उनके घर पर मिले थे. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले इस मुलाकात को लेकर सियासत तेज हो गई थी. हालांकि शिवपाल सिंह यादव का कहना था कि उन्होंने बाबा रामदेव को उत्तर प्रदेश में पतंजलि का प्लांट लगाने का न्यौता दिया है. 

तिजारावाला ने कहा, 'यह मुलाकात राजनीतिक नहीं थी. शिवपाल सिंह ने हमें उत्तर प्रदेश में प्लांट लगाने का न्यौता दिया और हमने उसे स्वीकार कर लिया.'

पतंजलि देश में 5 नए संयंत्र स्थापित करने जा रही है. इसके लिए राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम एवं हरियाणा को प्राथमिकता दी गई है. 

बाबा का यह दावा है कि 'पतंजलि के प्रॉडक्ट के आगे नेस्ले का पंछी उड़ जाएगा और कोलगेट का गेट निकल जाएगा.' जिस तरह से पतंजलि ने चार सालों में अपने कारोबार को बढ़ाया है, उसे देखते हुए बाबा के दावे को सच होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.

First published: 27 April 2016, 7:54 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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