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ई-वॉलेट में पैसा फिर भी पेटीएम यूजर्स परेशान

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 13 December 2016, 16:06 IST

कैशलेस इकोनॉमी बनाने की दिशा में उठाए गए नोटबंदी के कदम के बाद पेटीएम यूजर्स की संख्या में अचानक बेतहाशा बढ़ोतरी हुई. 8 नवंबर 2016 को की गई नोटबंदी की घोषणा के एक सप्ताह के भीतर ही शहरों के साथ तमाम गांवों के गलियों में पेटीएम से पेमेंट लेने वाले दुकानदारों की तादाद बढ़ गई और खरीदारों ने भी जमकर पेटीएम का इस्तेमाल किया.

लेकिन नोटबंदी की घोषणा के एक माह बाद आलम बदल गया है. खुद को स्मार्ट और डिजिटल इकोनॉमी का मजबूत हिस्सा समझने वाले पेटीएम यूजर्स को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है. हालात कुछ यूं हो गए हैं कि पेटीएम यूजर्स के ई-वॉलेट में पैसे तो हैं लेकिन इनसे खरीदारी नहीं हो पा रही.

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नोएडा सेक्टर 72 निवासी भानू प्रताप सिंह ने बताया कि नोटबंदी के बाद उन्होंने भी अपने स्मार्टफोन में पेटीएम वॉलेट इंस्टॉल किया और पैसे डालकर रोजमर्रा की खरीदारी करने लगे. नवंबर के आखिर तक तो हालात ठीक-ठाक रहे. लेकिन दिसंबर से दुकानदारों ने पेटीएम से पेमेंट लेना मना कर दिया. अब परेशान हूं कि बिना नगदी के कैसे रोजमर्रा का सामान खरीदा जाए.

साकेत, दिल्ली निवासी श्वेतांक टंडन की मानें तो नोटबंदी का फैसला बहुत अच्छा था. लेकिन इसके बाद अपने बैंक अकाउंट से रकम निकालना बहुत मुश्किल हो गया. एटीएम और बैंकों के बाहर इतनी लंबी लाइनें देखकर हिम्मत ही नहीं जुटा पाया. किसी तरह देर रात एटीएम से दो-दो हजार रुपये निकालकर गुजारा किया और कार्ड-ई वॉलेट से पेमेंट किया. लेकिन अब दिक्कतें सामने आने लगी हैं.

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पेटीएम यूजर्स की मानें तो जहां से वो लोग रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदते थे, अब दुकानदारों ने पेटीएम से पेमेंट लेना बंद कर दिया है. गली-मोहल्लों के छोटे परचून वाले दुकानदारों का कहना है कि पेटीएम वॉलेट के जरिये वो एक माह में 25 हजार रुपये ही अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर सकते हैं. जब लिमिट पूरी हो गई तो उसके बाद पेमेंट कैसे लें. अगर पेमेंट लेते हैं तो वो पैसा अकाउंट में ट्रांसफर नहीं हो पाएगा और वो इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे.

नोएडा सेक्टर 49 स्थित एक जनरल स्टोर के मालिक नीरज मित्तल का कहना है कि उन्हें भी दुकान में सामान भरने के लिए पैसे चाहिए होते हैं. रोज जिस भी कंपनी का सेल्समैन माल देने आता है, उसे नगद पैसे चाहिए होते हैं. पेटीएम से वो पेमेंट लेता नहीं. अब अगर सारी दुकानदारी पेटीएम से ही करेंगे तो माल कैसे खरीदेंगे और सेल्समैन को भुगतान कैसे करेंगे.

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वहीं, नोएडा सेक्टर 137 स्थित एक डिपार्टमेंटल स्टोर के मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रोजमर्रा का सामान बेचने वाले छोटे परचून के दुकानदार नगद में व्यवसाय करते हैं. यह लोग कर से बचने के लिए टिन नंबर नहीं लेते हैं. पेटीएम टिन नंबर वाले दुकानदारों को असीमित रकम अकाउंट में ट्रांसफर की सहूलियत देता है जबकि बिना टिन नंबर वाले एक माह में केवल 25 हजार रुपये ही अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं.

यानी एक दुकानदार अगर 25 हजार रुपये से ज्यादा का पेटीएम लेनदेन करता है तो वो इसके ऊपर की रकम अपने बैंक खाते में नहीं डाल पाएगा और न ही इस रकम को अपनी दुकान के लिए माल खरीदने में इस्तेमाल कर पाएगा. इसलिए दुकानदार 25 हजार रुपये की लिमिट पूरी होते ही पेटीएम पेमेंट लेने से मना कर देते हैं.

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पेटीएम की यह परेशानी छोटी नहीं है और तकरीबन देश के हर हिस्से में पेटीएम से पेमेंट लेने वाले हर दुकानदार को इससे जूझना पड़ा है. वहीं, अपने ई-वॉलेट में पैसा डालकर घूम रहे पेटीएम यूजर्स अब इससे अपने आस-पड़ोस में खरीदारी नहीं कर पा रहे. या तो उन्हें इसके लिए बिग-बाजार, इजी डे जैसे बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स में जाना पड़ता है या फिर नगदी खर्चकर पड़ोस की दुकान से खरीदारी करनी पड़ती है. 

First published: 13 December 2016, 16:06 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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