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तेल का खेल: पेट्रोल-डीजल की कीमत इसलिए कम नहीं करना चाहती मोदी सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 May 2018, 10:24 IST

बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों के कारण आलोचना का सामना कर रही मोदी सरकार पर लगता है इसका कुछ खास असर होता नहीं दिखाई दे रहा है. एक रिपोर्ट की मानें तो पेट्रोल डीजल पर सरकार फ़िलहाल एक्साइज ड्यूटी काम करने के मूड में नहीं है. सरकार इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के कम होने का इंतज़ार कर रही है. सरकार का मानना है कि पेट्रोल डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने से उसके रेवेन्यू पर बड़ा असर पड़ेगा और इससे कल्याणकारी योजनाएं मुश्किल में पड़ जाएंगी क्योंकि सरकार 2019 के चुनावों से पहले इनपर ज्यादा खर्च करना चाहती है.

इस मामले में सरकार अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर नजर रखे हुई है. हालांकि पिछले दो दिनों में तेल की कीमतों में 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है. सरकार ने उपभोक्ताओं को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए कर्नाटक चुनाव के दौरान कीमतें नहीं बढ़ने दी थी. इसी साल नवंबर में राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में चुनाव हैं इसलिए सरकार तेल की कीमतों के कम होने के लिए इंटरनेशनल बाजार का ही इंतज़ार कर रही है.

सूत्रों की मानें तो इस मामले में बीजेपी के नेता भी परेशान हैं और उन्हें लगता है कि यह उन्हें आने वाले समय में मुश्किल खड़ी करेगा, लेकिन उनका यह भी मानना है कि कभी-कभी कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं. कांग्रेस सरकार के दौर में साल 2014 के लोकसभा चुनाव अभियान में बीजेपी ने पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकट उसे खूब निशाने पर लिया था. सोशल मीडिया पर पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर खूब प्रचार हुआ और उसका लाभ बीजेपी को भी मिला.  

यह साल मोदी सरकार के लिए और भी मुश्किल भरा साबित हो सकता है क्योंकि विश्व बैंक ने ऊर्जा वस्तुओं, कच्चे तेल, गैस और कोयले की वैश्विक कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है. चुनाव से पहले कल्याणकारी योजनाओं में खर्च को बढ़ाने की सरकार की कोशिश राजस्व में कटौती से खतरे में पड़ सकती है.

विश्व बैंक के अप्रैल कमोडिटी बाजार के दृष्टिकोण के अनुसार, ओपेक और रूस द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण 2018 कच्चे तेल की कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल हो जाएगी, जो 2017 में 53 डॉलर की औसत कीमत से 22% अधिक है.

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First published: 28 May 2018, 10:20 IST
 
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