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तेल का खेल- पेट्रोल पर 100 फीसदी से ज्यादा टैक्स आपकी जेब पर डाल रहा है डाका

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 May 2018, 14:28 IST

आसमान पर पहुंच चुकी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट के फ़िलहाल कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं. मंगलवार की सुबह पेट्रोल की कीमत वित्तीय राजधानी मुंबई में 84.70 रुपये प्रति लीटर और दिल्ली में 76.87 रुपये प्रति लीटर के उच्च स्तर पर पहुंच गई. केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए करों ने कुल खुदरा ईंधन की कीमतों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. वर्तमान में पेट्रोल पर 100 फीसदी से अधिक टैक्स लगाया जाता है जबकि डीजल पर यह 66.48 प्रतिशत हैं. इन करों में केंद्रीय उत्पाद शुल्क और वैट शामिल हैं.

मोदी सरकार की सत्ता आने के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम नहीं की गई और उत्पाद शुल्क में लगातार वृद्धि की गई. वर्तमान में केंद्र सरकार पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 19.48 रुपये और डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर लेती है. जबकि राज्य पेट्रोल-डीजल पर अलग अलग वैट लगते हैं.

उदाहरण के लिए महाराष्ट्र पेट्रोल पर 46.52 प्रतिशत वैट लगाता है, केरल 34 फीसदी और गोवा पेट्रोल पर 17 फीसदी वैट लगाता है. जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल से कम हो गई थी तब पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में तेजी से वृद्धि की.

वित्त मंत्रालय के राजस्व संग्रह अनुमानों के मुताबिक केंद्र सरकार इस वित्त वर्ष के अंत तक पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स लगाकर 2.579 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा इकट्ठा करने की उम्मीद कर रही है. यह 2013-14 में 88,600 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह से कई ज्यादा है. पिछले वित्त वर्ष में यह संग्रह 2.016 लाख करोड़ रुपये था.

सरकार ने नवंबर 2015 से जनवरी 2016 में अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में कमी से मिलने वाले फायदे के लिए पांच बार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था. इससे पहले सरकार ने चार बार वैश्विक कच्चे तेल दामों में गिरावट से लाभ अर्जित करने के लिए नवंबर 2014 और जनवरी 2015 के बीच पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था.

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली बीजेपी सरकार सत्ता में आने के बाद से पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 11.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया. हालांकि पिछले साल जून में तेल की कीमतों में दैनिक संशोधन के बाद सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती की थी.

केयर रेटिंग्स के मुताबिक ईंधन की कीमतों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी से डब्ल्यूपीआई में लगभग 0.5 फीसदी और सीपीआई में लगभग 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. पेट्रोल के भाव में करीब 50 फीसदी और डीजल के भाव में 40 फीसदी से ज्यादा टैक्स लगता है. अगर एक्साइज में 1 रुपये प्रति लीटर की कटौती की जाए तो सरकारी खजाने को 13000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है.

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First published: 22 May 2018, 12:32 IST
 
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