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ऐसे खेला मोदी सरकार ने तेल पर खेल, दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा टैक्स

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 April 2018, 12:21 IST

रविवार को पेट्रोल की कीमत 74.40 रुपये प्रति लीटर हो गई. ये कीमतें बीजेपी की अगुआई वाली सरकार के कार्यकाल में सबसे उच्चतम हैं. दूसरी ओर डीजल की कीमत भी 65.65 रुपये के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अब लोगों की मांग है कि सरकार को इससे निपटने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती करनी चाहिए. रविवार को सरकारी तेल कंपनियां ने दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दरों में 19 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जिसके बाद कीमतें इस उच्च स्तर पर पहुंच.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल अब 74.40 रुपये प्रति लीटर है, जो 14 सितंबर 2013 के बाद सबसे ज्यादा है. जबकि पेट्रोल की कीमतें 76.06 रुपये और डीजल की कीमत 65.65 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई हैं.

दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा कीमत भारत में 

तेल मंत्रालय ने इस साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय तेल दरों में बढ़ोतरी होने के कारण पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी की की थी लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को पेश किए गए अपने बजट में कोई रियायत नहीं दी थी. दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा पेट्रोल और डीजल की कीमतें हैं, जिसमे दरों में से आधे हिस्सा टैक्स है.

नौ बार बढ़ाया टैक्स 

वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट के चलते जेटली ने नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के बीच नौ बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया लेकिन पिछले साल अक्टूबर में सिर्फ एक बार 2 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटाया गया. उस उत्पाद शुल्क में कमी के बाद केंद्र ने राज्यों से वैट को कम करने के लिए कहा था लेकिन उनमें से चार महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश ने इसे नजरअंदाज कर दिया. चौकाने वाली बात यह है कि इनमे से चार राज्य बीजपी के शासन वाले हैं.

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2017 में उत्पाद शुल्क में 2 रुपये प्रति लीटर का कटौती की थी, उस वक़्त दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 70.88 रुपये प्रति लीटर और डीजल रु 59.14 थी. उत्पाद शुल्क में कमी के कारण 4 अक्टूबर 2017 को डीजल की कीमतें 56.8 9 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल प्रति लीटर 68.38 रुपये पर आ गई थी.

अक्टूबर 2017 उत्पाद शुल्क में कटौती ने चालू वित्त वर्ष में सरकार के लिए 260 अरब रुपये (26,000 करोड़ रुपये) की लागत दी. नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के बीच सरकार ने वैश्विक तेल की कीमतों में कमी से लाभ उठाने के लिए नौ बार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया.

कुल मिलाकर पेट्रोल पर टैक्स शुल्क 11.77 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया और उन 15 महीनों में डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई. इससे सरकार ने 2016-17 में उत्पाद में दोगुनी से 2.42 ट्रिलियन (2,42,000 करोड़ रुपये) हासिल किये.

दूसरी ओर सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने पिछले साल जून में हर महीने की पहली और 16 तारीख को दारों में संशोधन के 15 साल पुराने नियम को बदल दिया.

First published: 22 April 2018, 12:15 IST
 
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