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पेट्रोल पंप पर कोई MDR चार्ज नहीं, 13 जनवरी के बाद भी कार्ड से भुगतान

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि 13 जनवरी के बाद भी पेट्रोल पंप डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट स्वीकार करेंगे. दरअसल इससे पहले पेट्रोल पंप डीलरों ने एलान किया था कि वे 13 जनवरी के बाद केवल कैश में ही डीजल और पेट्रोल भरेंगे. 

विवाद की वजह है मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर. सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल पंप पर कार्ड से भुगतान के दौरान कोई एमडीआर चार्ज नहीं लिया जाएगा. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को यह एलान किया. 

'तेल कंपनी या बैंक करेंगे वहन'

दरअसल बैंकों ने पेट्रोलियम डीलर्स को सूचित किया था कि वे क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर 1 फीसदी और डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर 0.25 फीसदी से 1 फीसदी के बीच शुल्‍क वसूलेंगे. 

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सरकार का रुख साफ करते हुए कहा, "13 जनवरी के बाद भी पेट्रोल पंप कार्ड से भुगतान स्वीकार करेंगे. तेल कंपनियां और बैंक इस बारे में चर्चा कर रहे हैं कि एमडीआर चार्ज को कौन वहन करेगा."

पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का विरोध

इससे पहले ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने 13 जनवरी तक ही देश भर के पेट्रोल पंपों पर डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान स्‍वीकार किए जाने का एलान किया था. 

ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (एआईपीडीए) ने रविवार को कहा कि बैंकों द्वारा कार्ड लेन-देन पर एक फीसदी का अतिरिक्त चार्ज लगाए जाने के खिलाफ यह फैसला लिया गया है.  पेट्रोल पंप एसोसिएशन का कहना था कि वो ऐसे हालात में कार्ड पेमेंट को मंजूर नहीं करेंगे. एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने एक प्रेस रिलीज जारी कर जानकारी दी थी. 

पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन की मानें तो ज्यादातर पेट्रोल पंप एचडीएफसी बैंक की POS मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं. पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन का ये फैसला ऐसे समय पर आया है जब सरकार ने पिछले महीने ही कार्ड से भुगतान पर 0.75 फीसदी छूट का एलान कर रखा है. 

14 जनवरी से कार्ड पेमेंट न लेने का एलान

एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने कहा कि एक फीसदी एमडीआर कटने के चलते यह निर्णय लिया गया कि अब 14 जनवरी से देश के सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों 53,840 रिटेल आउटलेट्स पर क्रेडिट और डेबिट कार्ड के जरिए पेमेंट स्वीकार नहीं किया जाएगा.

एसोसिएशन का कहना है कि कुल मार्जिन 2.5 फीसदी है. इसमें उन्‍हें स्‍टाफ का खर्चा और बाकी मेंटेनेंस से जुड़े खर्च करने होते हैं. ऐसे में इतने कम मार्जिन में बैंक को शुल्‍क देना रिटेल आउटलेट्स के लिए मुमकिन नहीं है.  नए नियम से डीलरों को भारी घाटा होने की आशंका थी. अब केंद्र सरकार की सफाई के बाद विवाद का पटाक्षेप हुआ है.

First published: 9 January 2017, 4:20 IST
 
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