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रिटायरमेंट के बाद आपका पीएफ दिलवा सकता है ज्यादा पेंशन

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(ईपीएफओजलपाईगुड़ी)

कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन  की ज्यादा रकम मिल सके इसके लिए केंद्र सरकार एक बेहतर पहल कर सकती है. इसके तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) आधारित पेंशन योजना के जरिये अंशधारकों को नियोक्ताओं के अनिवार्य योगदान के अलावा पेंशन योजना में स्वैच्छिक योगदान देने की अनुमति दे सकती है. 

अभी तक मूल वेतन और महंगाई भत्ते को मिलाकर अधिकतम 15 हजार रुपये के मासिक वेतन पर पेंशन कोष के अंशदान की कटौती की जाती है. इसमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कर्मचारी इससे ज्यादा कमाता है.

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केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त डॉ. वीपी जॉय ने कहा कि हम ईपीएस 95 के तहत कर्मचारियों को योगदान देने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं. इससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद अधिक लाभ मिल सकेगा. पेंशन फंड भविष्य निधि की तरह व्यक्तिगत कोष नहीं है.

मूल वेतन का 1.16 फीसदी सरकार सब्सिडी के रूप में देती है

उन्होंने कहा कि यह फिलहाल एकमात्र परिभाषित पेंशन योजना है. हम यह नहीं देखते कि किसी व्यक्ति का कितना योगदान है. लेकिन अनुमान लगाएं तो 15 हजार रुपये के मूल वेतन के साथ करीब 35 साल की नौकरी के बाद करीब 7,500 रुपये प्रतिमाह की पेंशन बनेगी.

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बता दें कि ईपीएफओ के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन और डीए के कुल योग का 12 फीसदी ईपीएफ में जमा होता है. जबकि नियोक्ता (एंप्लायर) के 12 फीसदी योगदान में से 8.33 फीसदी कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में जमा होता है और शेष ईपीएफ में जुड़ जाता है.

इतना ही नहीं मूल वेतन का 1.16 फीसदी सरकार सब्सिडी के रूप में देती है. इसके जरिये पेंशन खाते में 15 हजार रुपये मूल वेतन सीमा के साथ अधिकतम 1,424 रुपये प्रतिमाह जुड़ जाते हैं.

First published: 15 June 2016, 8:14 IST
 
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