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ट्रेनों में इंटरनेट उपलब्ध करने को योजना हुई बंद, पूर्व रेल मंत्री ने की थी घोषणा, अब बताया ये कारण

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 August 2021, 9:51 IST

 

भारतीय रेलवे (Indian Railways) द्वारा चलने वाली ट्रेनों में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने की घोषणा के दो साल बाद, सरकार ने यह कहते हुए परियोजना को ड्रॉप दिया कि यह लागत प्रभावी नहीं है. सरकार ने संसद को यह जानकारी दी है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि पायलट परियोजना के रूप में हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में सैटेलाइट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से वाई-फाई आधारित इंटरनेट सुविधा प्रदान की गई थी. कहा गया है कि यह तकनीक बैंडविड्थ शुल्क के रूप में लागत प्रभावी नहीं थी. साथ ही यात्रियों के लिए इंटरनेट बैंडविड्थ उपलब्धता अपर्याप्त थी.

उन्होंने कहा "इसलिए परियोजना को ड्रॉप कर दिया गया था. वर्तमान में ट्रेनों में वाई-फाई आधारित इंटरनेट सेवाओं के प्रावधान के लिए उपयुक्त लागत प्रभावी तकनीक उपलब्ध नहीं है." पूर्व रेल मंत्री पीयूष गोयल ने 2019 में कहा था कि केंद्र अगले चार से साढ़े चार साल में ट्रेनों में वाईफाई सेवा देने की योजना बना रहा है.


वर्तमान में भारतीय रेलवे द्वारा 6,000 से अधिक स्टेशनों पर सेल्फ सस्टेनेबल आधार पर रेलवे को बिना किसी लागत के वाई-फाई सुविधा प्रदान की जा रही है. रेल मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) रेलटेल की मदद से यह सुविधा प्रदान की जा रही है.

पूर्व रेल मंत्री ने इस साल की शुरुआत में लोकसभा में कहा था कि देश में अब तक 5957 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई आधारित इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा "रेलटेल ने ग्रामीण भारत में अपने नेटवर्क का लाभ उठाने और पीएम वानी सक्षम सामुदायिक वाई-फाई सेवाएं प्रदान करने के लिए अपने सहयोगी ब्रॉडबैंड सेवा मॉडल के लिए डीओटी को प्रस्ताव प्रस्तुत किया है."

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First published: 6 August 2021, 9:51 IST
 
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