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मोदी की बुलेट ट्रेन की राह में आये महाराष्ट्र के 70 जिलों के लोग, जमीन देने से इंकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 June 2018, 12:07 IST

केंद्र की पीएम मोदी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर जमीन अधिग्रहण को लेकर समस्या खड़ी हो गई है. पीएम मोदी की इस परियोजना को लेकर कहा जा रहा है कि अगस्त 2022 तक यह पूरी हो जाएगी. लेकिन, महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण के मामले को लेकर यह परियोजना लटकती हुई दिख रही है.

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महाराष्ट्र के पालघर जिले  के स्थानीय समुदायों और जनजातीय लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और इस परियोजना के लिए अपनी जमीनें देने से इंकार कर रहे हैं. बता दें कि इस परियोजना के लिए लगभग 70 जिले से ज्यादा आदिवासी गांवों के लोग जमीन देने से इनकार कर रहे हैं.

बता दें, पीएम मोदी की बुलेट ट्रेन परियोजना देश की पहली हाई स्पीड रेल परियोजना है, जिसकी कुल लंबाई 508 किलोमीटर है. साथ ही इस पर जनवरी 2019 से काम शुरू होना है. वही सरकार ने इस साल के अंत तक इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य पूरा करने की डेडलाइन तय की है. बता दें कि इस हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का करीब 110 किलोमीटर का हिस्सा महाराष्ट्र के पालघर जिले से होकर गुजरता है.

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वही इस पर रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हमें विरोध झेलना पड़ रहा है. लेकिन हमें उम्मीद है कि इस प्रॉजेक्ट पर काम टाइमलाइन के भीतर ही शुरू हो जाएगा. हम जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को सर्किल रेट से 5 गुना अधिक दाम ऑफर कर रहे हैं."

अधिकारी ने यह भी कहा कि "पालघर जिले के कुछ गांवों में 200 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण को लेकर कुछ विरोध है. इनमें से ज्यादातर आदिवासी गांव हैं और इनमें विकास की खासी कमी है. स्थानीय राजनीति भी यहां विरोध को हवा दे रही है, जबकि यह प्रॉजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का होने के साथ ही लोकल डिवेलपमेंट में भी महत्वपूर्ण साबित होगा."

वही अधिकारी ने आशा जताते हुए कहा, "इन 73 गांवों में से 50 गांव जल्दी ही राजी हो सकते हैं. इनसे बातचीत की प्रक्रिया जारी है. मुख्य समस्या 23 गांवों के साथ है, जो रेलवे के साथ किसी भी तरह की वार्ता के लिए ही तैयार नहीं हैं. यही नहीं सर्वे के दौरान उन्होंने हमारे अधिकारियों के साथ झड़प का भी प्रयास किया."

First published: 2 June 2018, 11:53 IST
 
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