Home » बिज़नेस » PM Modi decision on curbing black money: Know how badly it impacts on investors of real estate & property
 

प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों की एक ही रात में लग गई वाट

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 9 November 2016, 14:29 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कालेधन पर लगाम लगाने के लिए अब तक छपे 500 और 1000 रुपये के करेंसी नोटों को 9 नवंबर से प्रतिबंधित करने का सबसे बुरा असर रीयल इस्टेट सेक्टर पर पड़ा है. बढ़िया मुनाफे की चाहत में प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों पर सरकार की दोहरी मार पड़ी है.

दरअसल, यह जगजाहिर बात है कि देश में अबतक सबसे ज्यादा ब्लैकमनी का लेन-देन रीयल इस्टेट सेक्टर में होता था. प्रॉपर्टी खरीदते वक्त जिन लोगों के पास एक नंबर का (व्हाइट मनी) धन होता था, उन्हें भी नगदी (कैश) देना पड़ता था. इसके लिए वे तमाम लोगों से पैसे जुटाते थे.

जबकि कालाधन रखने वाले लोग प्रॉपर्टी की बाजार कीमत से कम पर रजिस्ट्री कराकर कम व्हाइट मनी और ज्यादा ब्लैकमनी देकर प्रॉपर्टी खरीद लेते थे. 

यानी खरीदार के पास चाहे कालाधन हो या सफेद, प्रॉपर्टी खरीदते वक्त विक्रेता को ब्लैकमनी जरूर चाहिए होती थी. इसके पीछे की तमाम वजह भी होती थीं. जिनमें कैपिटल गेन, इनकम टैक्स, रजिस्ट्री अमाउंट समेत कई अन्य बातें शामिल होती थीं.

हालांकि, इन सबके चक्कर में ऐसे लोग जिन्हें निवेश नहीं बल्कि रिहायश और सिर छिपाने के लिए प्रॉपर्टी खरीदनी होती थी, वे ब्लैकमनी न होने के चलते इसे नहीं खरीद पाते थे.

रातोंरात बदल गया पूरा परिदृश्य

पर अब पीएम मोदी की एक घोषणा से पूरा परिदृश्य ही बदल गया है. अब तक जो ब्लैकमनी की ख्वाहिश रखते थे, उनके लिए वही ब्लैकमनी जहर बन गई है. क्योंकि ब्लैकमनी रखने वालों के पास यह भारी तादाद में होती है इसलिए इसे 500 और 1000 रुपये के नोट के रूप में ही रखा जाता है.

अब जब 8 नवंबर 2016 तक छपे 500 और 1000 के नोटों के प्रचलन पर पाबंदी लगा दी गई है, जिनके पास भी यह नोट बोरों में या फिर भारी संदूकों-कमरों आदि में रखे हैं, उनकी नींद-चैन उड़ गया है.

केवल एक रात में ही प्रॉपर्टी के दाम अब अर्श से फर्श पर आ गए हैं. आलम यह है कि अब आम खरीदार भी ब्लैकमनी देकर प्रॉपर्टी खरीदने की चाह रख रहा है लेकिन ब्लैकमनी लेकर बेचने वाले गायब हो गए हैं.

पूरा रोडमैप पहले ही तैयार कर लिया था

वैसे भी बता दें कि दो साल पहले संसद सत्र के दौरान प्रश्नकाल में एक सांसद ने रीयल इस्टेट सेक्टर में कालेधन के बड़े लेन-देन को लेकर इस पर कार्रवाई करने के लिए कहा था. लेकिन यह एक दिन में होने वाली कार्रवाई नहीं है.

पीएम मोदी ने चुनाव जीतने के साथ ही अपने मन में इसके लिए एक रोडमैप तैयार किया और पहले जनधन योजना के तहत लोगों के बैंक खाते खुलवाए, सब्सिडी की रकम बैंकों में भिजवानी शुरू की, आधार कार्ड से बैंक खाते जुड़वाए और अब यह फैसला सुना दिया.

अब जिन लोगों ने पिछले एक दशक के भीतर प्रॉपर्टी में मुनाफे के लिए निवेश किया है, उन्हें खासा नुकसान उठाना पड़ेगा. इसकी प्रमुख वजह की उन्हें प्रॉपर्टी के खरीदार नहीं मिलेंगे जो ब्लैकमनी दें और व्हाइट मनी में इतनी रकम देने वालों की संख्या काफी कम है.

ब्लैकमनी वाले अब चाहेंगे कि वे ज्यादा रकम देकर कुछ भी खरीद लें लेकिन 500 और 1000 रुपये के नोट लेने के लिए अब खरीदार तैयार नहीं होंगे. यानी दोनों ओर से मार प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों पर ही पड़ी. 

थर्ड पार्टी निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान

दरअसल पिछले एक दशक में विशेषरूप से दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो यहां पर प्रॉपर्टी में आए बूम की वजह से स्थापित रीयर इस्टेट कारोबारियों के साथ ही सैकड़ों की तादाद में नए बिल्डर भी पैदा हो गए.

यह छोटे-बड़े बिल्डर अपने फ्लैट एक नंबर यानी चेक-बैंक लोन के जरिये ही बेचते थे. लेकिन इसके साथ ही ऐसे भी हजारों लोग हैं जिन्होंने इन बिल्डरों के प्रोजेक्ट शुरू होने के साथ ही अपनी व्हाइट-ब्लैकमनी लगाकर इनमें प्रॉपर्टी बुक कराई. 

इसकी वजह कि बिल्डरों ने इन्हें कुछ ही सालों में निवेश की गई रकम के दोगुने-तीन गुने होने का सपना दिखाया. शुरुआत में ऐसा हुआ भी. लेकिन रीयल इस्टेट बाजार का बुलबुला फूलकर फूटने के बाद पिछले दो-तीन सालों में वैसे ही मंदी के दौर से गुजर रहा था. अब इस फैसले से केवल मुनाफे के लिए इन प्रोजेक्टों में निवेश करने वाले थर्ड पार्टी व्यक्तियों को नुकसान हो गया क्योंकि उन्हें अब खरीदार नहीं मिलेंगे.

First published: 9 November 2016, 14:29 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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